June 14, 2018

01.06.2018 (पटना) : स्थानीय कला एवं शिल्प महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस महाविद्यालय के ‘‘प्रथम पूर्ववर्ती विद्यार्थी सम्मेलन" (सी॰ए॰सी॰ एलूमिनि मीट-2018) का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक ने कहा की बिहार में कला एवं शिल्प की विरासत काफी गौरवपूर्ण एवं समृद्ध रही है। पाटलिपुत्र प्राचीन महानगरों के रूप में पूरी दुनियाँ में विख्यात रहा है। ‘पटना कलम’ शैली की भी ख्याति पूरी दुनियाँ में रही है। राज्यपाल श्री मलिक ने कहा कि पटना ‘सुलेख कला’ का भी प्रमुख केन्द्र रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की कला का इतिहास यह बताता है कि सन् 1790 में चित्रकारों का एक दल मुर्शीदाबाद से आकर तत्कालीन बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में बसा। ये चित्रकार यूरोपीय और भारतीय दोनों कला की बारीकियों को समझते थे। मुगल शैली और कंपनी शैली के समन्वय से बनी बिहार की प्रान्तीय कला शैली की शुरूआत बिहार में हुई। कालान्तर में यहाँ ‘पटना कलम’ शैली विकसित हुई, जिसने पूरी दुनियाँ में ख्याति अर्जित की। उन्होंने कहा कि मुखाकृति चित्रण और मुक्त चित्रण दोनों शैलियाँ यहाँ विकसित हुईं। बिहार में यह पहला अवसर था, जब कला दरबारी संस्कृति से मुक्त होकर धीरे-धीरे आम जन-जीवन की ओर भी मुड़ने लगी। राज्यपाल ने कहा कि बिहार की मधुबनी पेंटिंग और मिथिलांचल की भित्ति चित्रण की कला भी काफी आकर्षक एवं विश्वविख्यात है। राज्यपाल श्री मल्लिक ने कहा कि सन् 1939 में स्थापित बिहार एवं झारखंड के एकमात्र इस कला एवं शिल्प महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्रों ने बिहार एवं भारत को पूरे विश्व में कला की दुनियाँ में काफी प्रतिष्ठा दिलायी है। पूर्ववर्ती छात्रों को इस महाविद्यालय के विकास हेतु बराबर अपने सुझाव देते रहना चाहिए। अपने कॉलेज के दिनों को आदमी कभी नहीं भूलता और इन्हें आजीवन याद रखता है। कॉलेज के दिन दरअसल अविस्मरणीय होते हैं, जिनके आगे आदमी सारी खुशियाँ वार देता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि 70 के दशक में पटना विश्वविद्यालय में शामिल इस महाविद्यालय की कला की दुनियाँ में काफी प्रतिष्ठा है। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक बिहार की ऐतिहासिक विरासतों को प्रदर्शित करने के लिए बिहार संग्रहालय एवं पटना संग्रहालय में विशेष दीर्घाएँ तैयार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि कला एवं संस्कृति के विकास हेतु राज्य में बेहतर माहौल बना है और कलाकारों को इससे लाभान्वित होना चाहिए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध समीक्षक प्रयाग शुक्ल ने कहा कि यह युग छवियों का युग है और इन सभी प्रकार की छवियों को बारीकी से चिन्हित करने की जिम्मेवारी कलाकारों पर आ पड़ी है। कार्यक्रम में स्वागत-भाषण महाविद्यालय के प्राचार्य अजय पाण्डेय ने किया, जबकि धन्यवाद-ज्ञापन पटना विश्वविद्यालय की प्रतिकुलपति श्रीमती प्रो॰ डॉली सिन्हा ने किया। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध कलाकार श्याम शर्मा एवं बिहार संग्रहालय के निदेशक भी उपस्थित थे।
June 14, 2018

31.05.2018 (दरभंगा) : प्रमंडलीय सुचना एवं जन-सम्पर्क कार्यालय में कार्यरत कृष्ण कुमार मल्लिक आज सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर कार्यालयकर्मी द्वारा उन्हें विदाई दी गयी, जिसमे डीपीआरओ कन्हैया कुमार, रमेश कुमार झा, मनीष कुमार आनंद आदि उपस्थित थे। डीपीआरओ कन्हैया कुमार ने बताया की श्री मल्लिक के द्वारा अवकाशोप्रांत कार्यालय में किये गए सकारात्मक कार्य-कलाप, व्यवहार, कुशलता को हमेशा याद किया जायेगा।
June 03, 2018

29.05.2018 (दरभंगा) : आईपीएस मनु महाराज के बाद जिला मुख्यालय के अंतिम छोड़ पर कोशी दियारा क्षेत्र स्थित तिलकेश्वर ओपी का निरिक्षण अगर किसी पुलिस अफसर ने किया तो वो हैं एसएसपी मनोज कुमार। जी हाँ ये वही दियारा क्षेत्र है जहाँ के बारे में एसएसपी मनोज कुमार को सुचना मिली की कुछ किसान डरे-सहमे हुए हैं, मात्र एक सुचना के आधार पर एसएसपी मनोज कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपने दल-बल के साथ करीब 25 बाइक पर सवार एक अलग लुक में पुलिस के जवानों के साथ चल पड़े दियारा। एसएसपी श्री कुमार ने बताया की काफी मुश्किल था दियारा पहुंचना। गूगल मैप पर रास्ते को देखा समझा और चल दिए। वहां पहुँच कर प्रखंड प्रमुख, मुखिया तथा फरियादियों से मिले, उनके हरेक बातों को ध्यान से सुना। पहले से क्या बेहतर व्यवस्था हो सकता है इसके लिए ऑन स्पॉट फैसला लिया। एसएसपी श्री मनोज कुमार ने बताया की वहां के थानेदार ने उनको जर्जर मकान स्थित तिलकेश्वर ओपी से अवगत कराया। थानेदार ने बताया की लगभग 1974 से यहाँ पुलिसिंग हो रही है लेकिन समय के हिसाब से सुविधा काफी काम है। एसएसपी ने बताया की नए ओपी के लिए जगह भी चिन्हित कर लिया गया है, बहुत जल्द ही कार्य शुरू होगा। उन्होंने कहा की इसके बाद कुशेश्वरस्थान गए। वहां के लोगों ने एसएसपी को बताया की किसी विशेष दिन को छोड़कर रविवार को अमूमन भीड़ होता है। एसएसपी ने बताया की वहां दूकान थोड़ा अव्यवस्थित है जिसे अतिक्रमण हटाकर व्यवस्थित किया जायेगा। उन्होंने कहा की बिरौल एसएचओ व डीएसपी को ट्रैफिक ट्राली बनवाने को कहा है जिससे भीड़ वाले दिनों में बेहतर पुलिसिंग करने में मदद मिलेगा। किसी पत्रकार ने पूछा की चार जिलों का बॉर्डर है.. जवाब में एसएसपी ने कहा ये और अच्छी बात है अपराधियों को चारों तरफ से घेरकर पकड़ने में सहूलियत होगी। श्री कुमार ने बताया की निरिक्षण के दौरान तिलकेश्वर व कुशेश्वरस्थान में दोनों जगह पूजा अर्चना भी किया। कोशी नदी में पार करते समय जब नाव की रस्सी छूट गयी..इसपर एसएसपी ने कहा की ये एक सबक भी मिला की अगले बार से लाइफ सेविंग जैकेट लेकर जायेंगे। उन्होंने कहा की वहां से लौटने के बाद डीएम साहब को फीड बैक भी दिया है।

आईपीएस मनु महाराज ने बताया की दियारा क्षेत्र का निरिक्षण काफी मुश्किल था। अपराधी को घोड़े से पीछा कर पकड़ा था। एसएसपी श्री महाराज बताते हैं की उस क्षेत्र के लिए घोडा सबसे बेहतर सवारी है।
June 03, 2018

29.05.2018 (दरभंगा) : ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के जुबली हॉल में पीजी समाजशास्त्र विभाग की ओर से महिला सशक्तिकरण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक पद्मभूषण डॉo बिन्देश्वर पाठक ने कहा कि नारियां तभी सशक्त होंगी जब कन्या भ्रुण हत्या को रोका जाएगा। उन्होंने स्त्री-पुरुष के अनुपात को ठीक करते हुए बालिकाओं को शिक्षित करने की अपील की। इस अवसर पर भारतीय मंडन सोशियोलॉजी ऑफ़ सेनिटेसन चेयर की स्थापना की घोषणा की। आधुनिक काल में महिलाओं ने विश्व मंच पर अपनी विजय पताखा लहराई है। वेदों में महिला को विद्या, धन और ताकत की प्रतिमूर्ति की संज्ञा दी गई है। उनका मानना था उस समय में कि नारी कभी भी अपनी क्षमता का दुरुपयोग नहीं करेंगीं। बल्कि वह मानव और समाज कें विकास में अपनी शक्ति का सदुपयोग करेंगी। उन्होंने कहा कि समाजशास्त्री का कार्य है कि समाज में समानता स्थापित करना। अहिंसा के माध्यम से समाज में समरूपता स्थापित करने का प्रयास समाजशास्त्रीयों को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति एवं धर्म गलत नही है बल्कि उसमें जो विभेद हैं वह गलत है। समाजशास्त्री क्रियाशील बने सिर्फ पुस्तक तथा वर्ग लेने से कार्य नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस आर्गेनाईजेशन के केंद्र में सामाजिक दर्शन है। आज की नारी को अपने अधिकार और कर्तव्य का बोध हो गया है। अब वह न तो जयशंकर प्रसाद की मात्र श्रद्धा और विश्वास की प्रतीक है न हीं मैथिलीशरण गुप्त की अबला। वह पुरुषों के समकक्ष अधिकारों की अधिकारिणी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के हर हिस्से में नारियां सशक्त हुई हैं, लेकिन नारी- उत्थान के लिए समाज में उन्हें बराबरी का हक दिलाने के लिए और प्रयास की आवश्यकता है इसके लिए आवश्यक है कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकें। स्त्री पुरुष के अनुपात को ठीक करते हुए नारियों को शिक्षित करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर बीज भाषण बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉo ए.के. पांडेय ने कहा कि नारी भी मानव होती है और उसे भी समानता का अधिकार मिलना चाहिए। कहने के लिए उसे बहुत अधिकार दिया गया है लेकिन अभी भी सुधार की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार के साथ-साथ समाज को भी कार्य करना होगा। नगर विधायक संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी महिला पर दी है, वही विदेशों में देश की छवि निखारने की जिम्मेदारी महिला को दे रखे हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महिला सशक्तिकरण के प्रति क्या सोच है। इतना ही नहीं केंद्र की योजनाओं का केंद्र बिंदु महिला ही है। उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में नारी सशक्तिकरण के मामले में बिहार देश में अव्वल स्थान पर है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉo मुस्तफा कमाल अंसारी ने कहा कि नारी किसी भी समाज के आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है इस वजह से उसके उन्मुखीकरण तथा विकास के लिए हर हमेशा प्रयास रहना चाहिए। नारी का विकास होगा तो समाज का विकास होगा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. ऐo केo पॉल ने कहा कि नारी को उपेक्षित करने से समाज का विकास नहीं होगा। भूमंडलीकरण के दौर में भी महिलाओं को उचित अधिकार नहीं मिला। उन्होंने महात्मा गांधी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महिला के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका की चर्चा करते हुए कहा कि जहाँ गांधी ने अपने दर्शन में नारी सशक्तिकरण पर बल दिया वहीं नीतीश कुमार ने गांधी के दर्शन को मूर्त रूप दिया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. जय गोपाल ने कहा कि नारी सशक्तिकरण में विश्वविद्यालय प्रयासरत है। नारी सशक्तिकरण बहुत पुराना विषय है लेकिन आज भी यह प्रसांगिक है। वातावरण में शारीरिक रूप से पुरुष को ताकतवर बताया जिसका ज्यादा फायदा उन लोगों ने उठाया है। जिस वजह से नारी सशक्तिकरण का मुद्दा बना हुआ है। नारी शारीरिक रूप से कमजोर है जिस वजह से उसे ताकतवर बनना पड़ेगा, तभी जाकर नारी का सशक्तिकरण होगा। विधायक डॉo फैयाज अहमद ने अपने संबोधन में कहा कि नारी सशक्तिकरण समय की पुकार है। इस अवसर पर डॉo बिंदेश्वरी पाठक को भारत रत्न से सम्मानित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। संगोष्ठी में आगत अतिथि का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने तथा मंच संचालन डॉo पुतुल सिंह ने किया।
June 03, 2018

27.05.2018 (दरभंगा) : लहेरियासराय स्थित इंडोर स्टेडियम में डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह एवं एसएसपी मनोज कुमार ने चौकीदारों को उनके कर्तव्य का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा की अपराध नियंत्रण में चौकीदारों की भूमिका विशेष होती हैं। उन्होंने चौकीदारों को कहा की आपकी कोई भी समस्या होगी उसके निदान के लिए हर संभव प्रयास होगा। आप अपनी जिम्मेवारी समझें। एसएसपी मनोज कुमार ने चौकीदारों को टिप्पस देते हुए कहा की आप पुलिस के महत्वपूर्ण बल हैं। उन्होंने कहा की कम समय में ज्यादा धन इकठ्ठा करने वालों के हर गतिविधियों पर नजर रखें। शराब कारोबारियों पर नजर रखें, कोई संदिग्ध सबूत मिले तो फ़ौरन सूचित करें। एसएसपी श्री कुमार ने सभी चौकीदारों को कहा की स्मार्ट फ़ोन कैसे चलाते हैं, जल्द सिख लें, अपराध नियंत्रण में काफी फायदा होगा। उन्होंने कहा की जिनके पास स्मार्ट फ़ोन उपलब्ध नहीं हैं और कोई जरूरी सुचना है या कोई सदिग्ध फोटो या वीडियो हैं, वो अपने जान-पहचान वालों के मोबाइल से मेरे नंबर पर फ़ौरन व्हाट्सप्प करें। उन्होंने सभी चौकीदारों को कहा की अपने-अपने क्षेत्र में अपराधियों की जानकारी इकठ्ठा कर बताएं। एसएसपी श्री कुमार ने कहा की किसी से डरने की जरूरत नही है, हम आपके हर अच्छे कार्य में साथ हैं। उन्होंने सभी चौकीदारों से ये भी कहा की अगर कोई गलत संगत में पकड़ा जायेगा तो कार्रवाई की जाएगी।