July 15, 2018

02.07.2018 (दरभंगा) : धरोहर बचाओ अभियान के तहत (सभापति- प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति-सह-हायाघाट-विधायक) अमरनाथ गामी के नेतृत्व में सैकड़ो लोगों ने लहेरियासराय स्थित धरनास्थल से आयुक्त कार्यालय तक मार्च निकाल कर आयुक्त मयंक वड़वड़े को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौपने के उपरान्त मीडिया से बात करते हुए विधायक श्री गामी ने कहा की दरभंगा राजकिला करोड़ों मैथिल के भावनाओं से जुड़ा हुआ है तथा स्मिता का प्रतीक है, उसे बचाना है। उन्होंने कहा की चार साल पूर्व भूकंप में किला का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद जिला प्रशासन के द्वारा वहां पर नोटिस बोर्ड लगा दिया गया था, की इस रास्ते से गुजरना खतरे से खाली नहीं है, कृपया वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करें। उन्होंने कहा की आजतक उस क्षतिग्रस्त हिस्से का मरम्मत नहीं हो सका। विधायक श्री गामी ने कहा की इस ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए किला का मरम्मत होना चाहिए तथा किले के अंदर जो जलाशय है, उसे बार-बार भरने का जो प्रयास किया जा रहा है, उसपर अविलम्ब रोक लगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है की ग्लोबल वार्मिंग के कारण निजी जलाशय हो या सरकारी, उसे भरा नहीं जा सकता। उस जलाशय में मछली पालन या मखाना उत्पादन किया जा सकता है। उन्होंने कहा की पिछले कई सालों से वो लगातार प्रयासरत हैं, जिससे उन्हें सफलता मिली है, जलाशय को भरने से रोकने में। उन्होंने कहा की निजी भूखंड पर किनके अनुशंसा पर सड़क बनाया गया, सम्बंधित विभाग ने कैसे बना दिया, जांच किया जाए। श्री गामी ने कहा की ऐतिहासिक दिवार को तोड़ने की खबर सोशल मीडिया पर देखने के बाद आज सैकड़ों की संख्या में लोगों ने यहाँ उपस्थित होकर आयुक्त से मांग की है की, दिवार की मरम्मत करवाई जाए, तथा जो लोग भी इस गलत कार्य में सम्मिलित हैं उनपर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा की धरोहर बचाओ अभियान लगातार जारी रहेगा। आयुक्त श्री मयंक वड़वड़े ने कहा की दरभंगा के धरोहर ऐतिहासिक राजकिला को जो तोडा गया है तथा जलाशय को जो भरने का काम किया गया है, उसकी जांच की जायेगी। आयुक्त श्री वड़वड़े ने कहा की पुरात्तव विभाग को भी पटना से बुलाया जाएगा, जांच होगी, तथा कमिटी बनाकर इसका निराकरण किया जाएगा।
July 01, 2018

30.06.2018 (पटना) : डीएम कुमार रवि ने पुलिस अधीक्षक यातायात, जिला परिवहन पदाधिकारी,एवं नगर दंडाधिकारी जिला नियंत्रण कक्ष, पटना को निर्देश दिया है कि न्यू बाईपास, बेली रोड, एवं गाँधी मैदान में स्कूली बसों का अनाधिकृत पार्किंग न हो। डीएम श्री रवि ने बताया कि न्यू बाईपास, बेली रोड एवं गाँधी मैदान में स्कूली बसों को यत्र-तत्र पार्किंग कर दिया जाता है। जबकि स्कूली बस संबंधित विद्यालय परिसर या अन्य पार्किंग स्थल में रहना चाहिए। उन्होंने कहा की यदि संचालक के माध्यम से ऐसे बसों को संचालित किया जाता है तो संचालक द्वारा निर्धारित किये गये परिसर में ही बसों को पार्क किया जाना चाहिए। प्रायः ऐसा देखा जा रहा है कि ऐसे स्कूल बसों को खासकर न्यू बाईपास, बेली रोड एवं गाँधी मैदान स्थित खाली सड़कों पर अनाधिकृत रूप से यत्र-तत्र सड़क के किनारे खड़ी कर दी जाती है, जिसके कारण अनावश्यक रूप से जाम की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे आम जन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे सभी विद्यालयों एवं उसकी संचालित बसों की पहचान के लिए पदाधिकारियों की टीम प्रतिनियुक्त कर सर्वे करा लें। डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि निर्धारित पार्किंग स्थल में यदि स्कूली बसों की पार्किंग नहीं की जाती है तथा न्यू बाईपास, बेली रोड एवं गाँधी मैदान स्थित खाली स्थलों में यत्र-तत्र पार्किंग की जाती है तो ऐसे स्कूली बसों का निबंधन रद्द करें। साथ ही साथ विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए प्रतिवेदित करें।
July 01, 2018

30.06.2018 (हाजीपुर) : पूर्व मध्य रेल मुख्यालय हाजीपुर में नागार्जुन जयंती के उपलक्ष्य में विचार गोष्ठी व कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने नागार्जुन के जीवन और रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा की कवि/लेखक नागार्जुन हमेशा से समाज की बेहतरी के लिए आवाज बुलंद करते रहे। उन्होंने संसार के लिए जो सपना देखा उसे पूरा करने के लिए कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना भी करते रहे हैं। उनका वक्तव्य था कि नागार्जुन की रचनाओं में शोषित, पीड़ित जनों की वाणी मुखर हुई है। इस अवसर पर वरिष्ठ सहायक वित्त सलाहकार अशोक कुमार प्रजापति ने कहा की नागार्जुन जनता के कवि थे। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से उपस्थित साहित्य प्रेमी कर्मचारियों ने भी बाबा नागार्जुन की रचनाओं एवं उनके जीवन पर अपने विचार प्रकट किए। यह कार्यक्रम दो सत्रों में विभाजित था। प्रथम सत्र में जहाँ नागार्जुन के ऊपर परिचर्चा का आयोजन हुआ, वहीं दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस कवि गोष्ठी में विभिन्न साहित्य प्रेमी कर्मचारियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया। वक्ताओं का आमतौर पर मानना था कि राजभाषा विभाग द्वारा बिहार के विभिन्न कवि/साहित्यकारों पर राजभाषा विभाग द्वारा समय-समय पर आयोजित कार्यक्रमों से उन्हें बहुत खुशी हुई है, और इसी क्रम में सृजनात्मक वातावरण का भी निर्माण हो रहा है। कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन अशोक कुमार श्रीवास्तव, राजभाषा अधिकारी द्वारा किया गया।
July 01, 2018

29.06.2018 (पटना) : बिहार में लागू मद्य निषेध की नीति, उसका कार्यान्वयन एवं प्रभाव का अध्ययन करने के लिये आये हुये छत्तीसगढ़ के 11 सदस्यीय अध्ययन दल ने मुख्यमंत्री के परामर्शी, नीति एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन अंजनी कुमार सिंह से 1 अणे मार्ग स्थित संकल्प सभागार में मुलाकात की। यह मुलाकात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ प्रस्तावित थी, लेकिन उनकी अस्वस्थता के कारण अंजनी कुमार सिंह ने अध्ययन दल के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री के परामर्षी अंजनी कुमार सिंह ने अध्ययन दल को विस्तार से शराबबंदी को राज्य में लागू करने के दौरान किए गए प्रयासों को बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू करना बहुत ही कठिन काम था। यहां के कुछ पढ़े लिखे वर्ग, डिफरेंट लॉबी के लोग इसके विरोध में थे। शराब से प्राप्त होने वाले बहुत बड़े राजस्व की हानि, पर्यटन पर बुरा प्रभाव जैसे कई कारण इसे बंद नहीं करने के पक्ष में बताए गए, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दृढ इच्छाशक्ति के कारण 05 अप्रैल 2016 से बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई। उन्होंने अध्ययन दल को बताया कि 9 जुलाई 2015 को महिलाओं के एक कार्यक्रम में कुछ महिलाओं की मांग पर मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की थी, कि अगली बार सरकार में आते ही शराबबंदी को राज्य में लागू करेंगे। चुनाव के पश्चात सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री ने इसके लिए पदाधिकारियों एवं अन्य लोगों से विचार-विमर्श किया। शिक्षा विभाग के द्वारा गाना, नाटक एवं कला जत्था के द्वारा गांव-गांव तक अभियान चलाया गया। शपथ पत्र भरवाया गया, दीवारों पर स्लोगन लिखवाए गए। इन सब चीजों से समाज में एक वातावरण शराबबंदी के खिलाफ बना। सरकार ने यह विचार किया कि शराबबंदी को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाए। 01 अप्रैल 2016 को राज्य में शराबबंदी लागू हो गयी, इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में देशी एवं विदेशी दोनों तरह के शराब की बिक्री एवं सेवन को रोक दिया गया। शहरी क्षेत्रों में भी सिर्फ विदेशी शराब बेचने की इजाजत रही, लेकिन शहरों में महिलाओं, बच्चों एवं सभी वर्ग के लोगों ने इसका विरोध किया। यह देखने के बाद 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी पूरे बिहार में लागू कर दी गयी। मुख्यमंत्री के परामर्शी श्री सिंह ने बताया कि पूर्ण शराबबंदी लागू करने के बाद पुराने कानून को बदलकर नया प्रोहिबिशन कानून बनाया गया। राज्य में चाहे कोई भी हो, अगर शराब पीते हुए या इसका व्यवसाय करते हुए पकड़ा गया तो उस पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाती है। कानून का कड़ाई से पालन कराने हेतु ब्रेथ एनालाईजर एवं सीमा पर जांच की कड़ी व्यवस्था की गई है। अन्य सटे किसी राज्यों में शराबबंदी न लागू होने से राज्य में इस कानून को सफल बनाने के लिए और कठिन परिश्रम करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के परामर्शी श्री सिंह ने कहा कि शराब के कारोबार से राज्य को 5000 करोड़ रूपये के राजस्व की प्राप्ति होती थी, किन्तु अगर पाॅच हजार करोड़ रूपये सरकार को राजस्व के रूप में आमदनी हो रही थी तो दस से पन्द्रह हजार करोड़ रूपये लोगों का शराब में खर्च हो रहा होगा। आज लोग उन पैसों का उपयोग अच्छे कामों के लिये कर रहे हैं, इसके लिये कई सर्वे कराये गये हैं। सर्वे में यह जानकारी मिली है कि इस पैसे का सदुपयोग लोग अच्छे खान-पान, शिक्षा, रहन-सहन पर करने लगे हैं, जिससे राज्य में कारोबार बेहतर हुआ है और राज्य को इससे अच्छा राजस्व प्राप्त होने लगा है। इस कार्य से जुड़े लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था भी सरकार द्वारा की जा रही है। शराबबंदी से पारिवारिक हिंसा तथा सड़क हादसों में कमी आयी है। छत्तीसगढ़ के अध्ययन दल ने बिहार में लागू शराबबंदी के अध्ययन के लिए क्षेत्रों का भी दौरा किया है। अध्ययन दल ने बताया कि हर जगह की महिलाओं ने इसकी काफी प्रशंसा की है। शराबबंदी से हो रहे फायदों के बारे में बताया है। अध्ययन दल के प्रतिनिधियों ने कहा कि हमारे राज्य के मुख्यमंत्री भी शराबबंदी के पक्ष में हैं, और इसके लिए एक वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ से आए अध्ययन दल में बस्तर के सांसद दिनेश कश्यप, जंजगीर चंपा की सांसद श्रीमती कमला देवी पटले, कवर्धा के विधायक अशोक साहू, कुनकुरी के विधायक रोहित कुमार र्साइं, छत्तीसगढ़ सरकार के उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव डी0डी0 सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल थे। अध्ययन दल से विचार-विमर्श के पश्चात मुख्यमंत्री के परामर्शी श्री सिंह ने अध्ययन दल के सभी सदस्यों को अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। उक्त बैठक में प्रधान सचिव मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन श्री आमिर सुबहानी, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा सहित मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अन्य पदाधिकारीगण तथा जीविका के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
July 01, 2018

28.06.2018 (दरभंगा) : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के त्रैमासिक बुलेटिन "विश्वविद्यालय दर्पण" का लोकार्पण प्रशासनिक भवन के सभा कक्ष में कुलपति प्रोo सुरेंद्र कुमार सिंह ने किया। लोकार्पण के उपरांत कुलपति ने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि छात्र संघ की सहभागिता में विश्वविद्यालय दर्पण का प्रकाशन एक नयी परंपरा की शुरुआत है। हम महामहिम कुलाधिपति के आभारी हैं जिनके निर्देशन में बुलेटिन के प्रकाशन के बहाने हमारी सर्जनात्मक सक्रियता मुखर हुई है। कुलपति प्रोo सुरेंद्र कुमार सिंह ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा की राज्य भवन के निर्देश पर छात्र संघ की सहभागिता में इस विश्वविद्यालय ने बिहार में सबसे पहले बुलेटिन का प्रकाशन प्रारंभ किया है। उन्होंने विगत वर्षों की उपलब्धियों को टेबुल बुक के रूप में प्रकाशित करने की उद्घोषणा की। इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रोo जय गोपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय दर्पण का प्रकाशन वस्तुतः उपलब्धियों का अभिलेखीकरण है। यह एक अच्छी पहल है। कुलसचिव मुस्तफा कमाल अंसारी ने विश्वविद्यालय दर्पण के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि संपादक मंडल ने इसे ससमय प्रकाशित कर जबर्दस्त काम किया है। यह वास्तव में विश्वविद्यालय का आईना है, जिसमें हम अपना अक्स बखूबी देख सकते हैं। प्रधान संपादक प्रोo चन्द्रभानु प्रसाद सिंह ने संकुचित किया कि फिलहाल यह जून सितंबर, दिसंबर एवं मार्च में प्रकाशित होगा। इसकी गुणवत्ता में परिष्कार हेतु निरंतर संवाद बना रहेगा। इस अवसर पर संपादक मंडल के सदस्यों में प्रोo रतन कुमार चौधरी, प्रोo हरेकृष्ण सिंह एवं सूरज कुमार, संकायाध्यक्ष डॉo मनोज कुमार झा सहित विश्वविद्यालय के तमाम पदाधिकारी उपस्थित थे।