December 12, 2018

11.12.2018 (पटना) : केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, बिहार सेक्टर, पटना और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना ने हमराही बनकर बिहार के नक्सल प्रभावित व सुदूर देहाती क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों को *टेलीमेडिसिन प्रोग्राम के अंतर्गत* निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रदान करने की शुरुआत कर दी है। यह चिकित्सा सेवा विशेष रूप से उन क्षेत्रों में उपलब्ध कराया जाएगा, जहाँ बुनियादी चिकित्सा सेवाएँ पूर्णरूपेण उपलब्ध नहीं है। इसका लाभ निश्चय ही सभी जरूरतमंदों तक पहुंचेगा। इस कार्यक्रम का लाभ लेने के लिए लोगों को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के नजदीकी कैम्प में किसी भी वृहस्पतिवार या शुक्रवार को पहुँचकर अपना पंजियन कराना होगा। पंजीयन उपरान्त उसी दिन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के चिकित्सक द्वारा उनका आवश्यक चिकित्सीय जाँच कर समुचित उपचार किया जाएगा। कुछ ख़ास बिमारियों के बेहतर उपचार के लिए विशेषज्ञों के परामर्श की आवश्यकता होती है, जिसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के अनुभवी व वरिष्ठ चिकित्सक द्वारा प्रत्येक सप्ताह मंगलवार को यह कार्य टेलीकांफ्रेंसिंग तथा विडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से पूरा होगा। इस सेवा के अंतर्गत रोगियों को एम्स, पटना आए बिना यहाँ के चिकित्सकों का निःशुल्क सेवा/परामर्श प्राप्त होगा। उपचार दौरान चिकित्सीय जाँच कराने, दवाइयां उपलब्ध कराने व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में आने वाला सम्पूर्ण खर्च का निर्वहन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल करेगी।
दो सप्ताह तक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाने के बाद आज कार्यालयी व विधिवत रूप से इस कार्यक्रम के शुभारंभ की उद्घोषणा बिहार सेक्टर, के०रि०पु०बल के चारु सिन्हा, भा०पु०से०, आईजी, नीरज कुमार, डीआईजी, एच० एस०मल्ल, डीआईजी व अन्य अधिकारियों तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के निदेशक प्रभात कुमार सिंह व अन्य वरीय चिकित्सकों की गरिमामयी उपस्थिति में की गई।
इस कार्य को वास्तविक आकार देने में बिहार सेक्टर, के०रि०पु०बल के अनिल बिष्ट, कमांडेंट व जीतेन्द्र कुमार, सहा० कमांडेंट तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के अनिल कुमार, सर्जन व टेलीमेडिसिन चिकित्सा प्रभारी का विशेष योगदान रहा है। यह कवायद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के निदेशक प्रभात कुमार सिंह, अनिल कुमार, सर्जन व टेलीमेडिसिन चिकित्सा प्रभारी के कुशल नेतृत्व तथा उनके टीम के विशेष सहभागिता, सहयोग व समन्वय से ही प्रारंभ हो पाया है।
December 12, 2018

10.12.2018 (दरभंगा) : डिविज़नल चेंबर ऑफ कॉमर्स के तत्वाधान में खाकी में इंसान को उनके बेहतर कार्य के लिए सम्मानित किया गया। चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पवन कुमार सुरेका ने बताया कि आज चेंबर ऑफ कॉमर्स की तरफ से इस सम्मान समारोह की मुख्य अतिथि एसएसपी श्रीमती गरिमा मल्लिक, सदर एसडीपीओ अनोज कुमार, अजय कुमार झा, पुलिस निरीक्षक सदर, सीताराम प्रसाद, नगर थानाध्यक्ष, राम किशोर शर्मा, थानाध्यक्ष लहेरियासराय, जितेन्द्र कुमार सिंह, यूनिवर्सिटी थानाध्यक्ष, आशुतोष कुमार झा, बेता थाना, राजन कुमार, सदर थाना, उदय शंकर, कोतवाली थाना, राज नारायण सिंह बहादुरपुर थाना, गौतम कुमार, मब्बी, आर. एन. सिंह, विश्वविद्यालय थाना, विजय कुमार सिंह, अजित कुमार, नगर थाना को चादर मोमेंटो से सम्मानित किया गया।

पवन कुमार सुरेका ने बताया की चेंबर ऑफ कॉमर्स के तरफ से शहर के सम्मानीय सभी पुलिस कर्मियों का एक साथ सम्मान व स्वागत करना संभव नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि औरों को हम सम्मान नहीं देते। उन सभी के मेहनत के दम पर पुलिस कप्तान या बाकी अधिकारी का मनोबल बढ़ता है। इस सम्मान समारोह में चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रधान सचिव विजय कुमार बरोलिया ने एसएसपी गरिमा मल्लिक के सम्मुख व्यापारियों की कुछ समस्याओं और कुछ सुझाव रखें, जिसपर एसएसपी ने आश्वस्त किया है कि उनके सुझाव पर पुलिस विभाग कार्यवाही करेगी। एसएसपी गरिमा मल्लिक ने व्यापारियों से अनुरोध किया कि व्यापारी अपने संस्थानों में सीसीटीवी जरूर लगवाएं। संस्थान के अंदर के साथ-साथ एक मुख्य द्वार पर और एक कैमरा रोड की तरफ जरूर लगाएं। इस तरह अगर सभी व्यापारी सीसीटीवी कैमरे लगाते हैं तो हमारा शहर सीसीटीवी सर्विलेंस में रहेगा जिससे अपराधियों पर नियंत्रण रखने में सुविधा होगी। एसएसपी ने व्यापारियों से अनुरोध किया कि कि वह अपने यहां जितने भी स्टाफ रखते हैं उनका एक बार पुलिस वेरीफिकेशन जरूर करवाएं। उन्होंने कहा कि अगर व्यापारी ज्यादा कैश लेकर अगर मार्केट में या बैंक में जाते हैं तो संबंधित थाना में भी एक बार सूचना दे सकते हैं। चेंबर ऑफ कॉमर्स के तरफ से डॉ. रामबाबू खेतान को उनके द्वारा ड्रग इंस्पेक्टर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कराने के साहसिक कदम के लिए सम्मानित किया गया।
December 11, 2018

10.12.2018 (दरभंगा) : सभी अधिकारी दिव्यांगजन के प्रति संवेदनशील बने एवं उन्हें सरकार की कल्याणकारी योजना का लाभ सहजता से दिलाएं। राज्य निशक्तता आयुक्त डॉ शिवाजी कुमार ने समाहरणालय स्थित सभागार में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन एवं डीएमसीएच के उपाधीक्षक दिव्यांगों के प्रमाण पत्र बनाने के लिए भी व्यवस्था विशेष व्यवस्था करें। 31 दिसंबर तक सभी दिव्यांगों का प्रमाण पत्र बन जाए इसे सुनिश्चित किया जाए। जिला पंचायती राज पदाधिकारी से कहा गया कि वह पंचायत से लेकर जिला स्तर के जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित कराए जिससे उन्हें भी दिव्यांग जनों के लिए सरकार के द्वारा दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी दी जा सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कहा गया कि सभी स्कूली बच्चों का वाणी एवं भाषा दिव्यांग की जांच कराएं। हर मान्यता प्राप्त विद्यालय में दिव्यांगों के एडमिशन की विशेष सुविधा हो। इसे शिक्षा विभाग सुनिश्चित करावे। साथ ही स्कूलों में दिव्यांगों के लिए विशेष शौचालय एवं पढ़ाई लिखाई की सुविधा हो यह भी सुनिश्चित किया जाए। सरकार का यह प्रावधान है कि दिव्यांगों को सरकारी सुविधाओं में सहूलियत के लिए सभी विभाग एक-एक नोडल ऑफीसर नियुक्त करें। 12 दिसंबर को जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र में लगने वाले चलंत लोक अदालत में दिव्यांग जनों के दिव्यांग का प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए विशेष व्यवस्था करने का अनुरोध सिविल सर्जन से किया गया। लीड बैंक मैनेजर से कहा गया कि मुद्रा योजना एवं अन्य स्वरोजगार योजना के तहत कम से कम 200 दिव्यांगों को ऋण प्रदान करें। कुशल युवा कार्यक्रम तथा सरकार के द्वारा शिक्षा के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ दिव्यांगों को देने को कहा गया। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी से कहा कि वे अपने-अपने प्रखंड से संबंधित स्टॉल डीआरसीसी में लगाएंगे और विकलांगता पेंशन सहित अन्य आवेदनों को प्राप्त कर उन्हें समय से उसका लाभ दिलवाना सुनिश्चित कराएंगे। पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता से कहा गया कि सड़कों पर वैसे स्पीड ब्रेकर को हटा दें जिन से दिव्यांगों को आवागमन में दिक्कत होती है जिससे की दिव्यांगों को रोड क्रॉस करने में सुविधा हो इसकी व्यवस्था की जाए।
निशक्तता आयुक्त ने आम नागरिकों से भी अनुरोध किया कि वे दिव्यांगजनों को अपना उच्च समर्थन दें जिससे उनका अपने दैनिक कार्य निष्पादन में सहूलियत हो। अपर समाहर्ता मोहम्मद मोबीन अली अंसारी ने जिला में दिव्यांगों के लिए अब तक किए गए कार्य तथा चल रहे योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। दिव्यांगजन अपनी शिकायत चौबीसों घंटे टोल फ्री नंबर 8448385590 पर कर सकते हैं। सभी सरकारी एवं गैर सरकारी सार्वजनिक स्थलों पर रैंप की व्यवस्था करने से संबंधित नोटिस निर्गत करने का निर्देश सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा को दिया गया । जिला परिवहन पदाधिकारी से कहा गया कि वह भी अपना एक स्टॉल चलंत लोक अदालत में लगाएं एवं सारथी योजना के तहत दिव्यांगों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की कार्यवाही करें। इस योजना के तहत दिव्यांगों को ड्राइविंग लाइसेंस के अप्लाई करने में मात्र 420 रूपए का नाम मात्र का फीस जमा करना होता है। गाड़ी खरीदने पर भी दिव्यांगों को रोड टैक्स तथा अन्य प्रकार के करों में छूट मिलती है। सरकार का यह प्रावधान है कि जिलाधिकारी भी प्रत्येक शुक्रवार को आम जनता से मिलने वक्त दिव्यांगों को विशेष सहूलियत प्रदान करेंगे तथा प्रत्येक महीने के शनिवार को दिव्यांगों के लिए मोबाइल कोर्ट की भी व्यवस्था कराएंगे। कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल को जिला में बनने वाले अर्ली इंटरवेंशन सेंटर का प्राक्कलन बनाने को भी कहा गया। उन्होंने परिसदन में विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि एवं बैंकों के मैनेजर के साथ भी बैठक की एवं दिव्यांगों को सुविधा प्रदान करने हेतु सरकार के दिशा-निर्देश से अवगत कराया।
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त डॉ कारी प्रसाद महतो ने बताया कि दिव्यांग जनों के प्रति आम नागरिकों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। तथा उनसे उन्हें विशेष रूप से मदद करने के लिए तत्पर रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार दिव्यांगों के कल्याण के लिए 38 प्रकार की योजनाएं चला रही है और जिला प्रशासन सभी तरह की योजनाओं का लाभ दिव्यांगों तक पहुंचाने के लिए कृत संकल्पित है।
बैठक में जिला पंचायत राज पदाधिकारी शत्रुघ्न कामती, नगर आयुक्त नगेंद्र प्रसाद सिंह, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजीव रंजन प्रभाकर, जिला परिवहन पदाधिकारी राजीव कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी ब्रजकिशोर लाल, प्रदीप कुमार झा एवं राकेश गुप्ता, डीसीएलआर पुष्पेश कुमार, डीपीएम जीविका मुकेश तिवारी, डीपीआरओ लालबाबू सिंह, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा रविशंकर तिवारी, सक्षम के प्रबंधक नवीन कुमार समेत सभी विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।
December 11, 2018

10.12.2018 (पटना) : ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’-भारतीय संस्कृति का प्राण तत्व है। पूरी धरती पर के लोगों, पूरे विश्व को अपने परिवार सरीखा समझने की दृष्टि भारतीय संस्कृति की अद्वितीय विशेषता है। अपनी इस सांस्कृतिक विरासत का स्मरण करते हुए मानवीय संवेदना के साथ काम करने पर मानवाधिकार के उल्लंघन की समस्या ही नहीं रह जायेगाी’’ - उक्त उद्गार, महामहिम राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने स्थानीय अधिवेशन भवन में बिहार मानवाधिकार आयोग द्वारा आयोजित -‘अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’-सह-राज्य मानवाधिकार आयोग के स्थापना-दिवस समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
राज्यपाल ने कहा कि सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाये रखने के लिए मानवाधिकारों का संरक्षण एवं संवर्द्धन नितांत आवश्यक है, क्योंकि मानवाधिकार वस्तुतः स्वतंत्रता, समानता एवं गरिमा के अधिकार हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों को सामान्यतः विभिन्न प्रकार के कानूनों के जरिये अधिकार प्राप्त होते हैं, परन्तु मानवाधिकार नागरिकों के जन्मसिद्ध अधिकार हैं, जिन्हें कानून बनाकर संरक्षण दिया गया है। श्री टंडन ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के मानवाधिकारों का संरक्षण सरकारों का प्रमुख दायित्व होता है। यह तभी संभव है जब सरकार के विभिन्न प्रशासनिक तंत्र, जो विभिन्न प्रकार के कानून, नीतियों-नियमों, कल्याणकारी योजनाओं इत्यादि का कार्यान्वयन करते हैं, वे इन्हें प्रभावकारी ढंग से एवं लगनशीलता से लागू करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशील, पारदर्शी एवम् कल्याणकारी शासन ही मानवाधिकारों का संरक्षण कर सकता है। सरकार की सभी प्रशासनिक संस्थाओं को इसे ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि मानवाधिकारों के संरक्षण में समाज के असंगठित क्षेत्रों में कार्य करने वाले उपेक्षित एवं कमजोर वर्ग के व्यक्तियों के प्रति विशेष संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है, चूँकि ऐसे वर्ग अपने मानवाधिकारों के हनन को प्रमुखता से नहीं उठा पाते तथा अपने मानवाधिकारों का हनन चुपचाप सहन करते हैं। राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक राज्य का प्रमुख दायित्व है कि वह नागरिकों के मानवाधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करे। इस उद्देश्य की प्राप्ति करने हेतु ‘बिहार मानवाधिकार आयोग’ ने राज्य सरकार की पर्याप्त सहायता की है एवं दोनों ने समुचित सहयोग और समन्वय के साथ कार्य किया है। कार्यक्रम में बिहार मानवाधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष जस्टिस मंधाता सिंह तथा आयोग के पूर्व सदस्य जस्टिस राजेन्द्र प्रसाद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह में राज्य के गृह सचिव आमिर सुबहानी एवं पुलिस महानिदेशक श्री के.एस. द्विवेदी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में बिहार मानवाधिकार आयोग की सचिव श्रीमती वंदना किन्नी ने बिहार मानवाधिकार आयोग की उपलब्धियों का उल्लेख किया। धन्यवाद ज्ञापन आयोग के उप सचिव गजेन्द्र सिंह ने किया।
December 10, 2018
09.12.2018 (दरभंगा) : लहेरियासराय स्थित जिला अतिथिगृह में राज्य निशक्तता आयुक्त डॉ. शिवाजी कुमार ने प्रेस वार्ता करते हुए दिव्यांग जनों के अधिकार एवं सरकार द्वारा उनके कल्याण के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार के हर एक विभाग को अपने बजट का 5% दिव्यांग जनों के कल्याण के लिए खर्च करने का प्रावधान है। दिव्यांग जनों को त्वरित न्याय के लिए वकील सहित सभी सुविधाएं निशुल्क दिए जाने का भी प्रावधान है। दिव्यांगता के आधार पर किसी को सरकारी सेवा के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता है। अगर दिव्यांगता के आधार पर किसी को सुविधा से वंचित किया जाता है तो 6 माह से 6 वर्ष तक की सजा दोषी व्यक्ति को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के सरकारी तथा सार्वजनिक भवनों में रैंप का होना जरूरी है। दिव्यांग जनों को ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य सुविधाओं में भी सरकार द्वारा छूट प्रदान की जाती है। सभी दिव्यांगों को मतदान का अधिकार मिले इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बूथों पर दिव्यांगों के लाने एवं ले जाने के लिए स्पेशल प्रावधान किए गए हैं। बूथों पर रैंप को अनिवार्य बनाया गया है। निशक्तता आयुक्त ने दिव्यांगों के लिए यूनिक डिसेबिलिटी पहचान पत्र बनाने तथा सबको यूडी आईडी पोर्टल से जोड़कर सरकारी योजनाओं का लाभ देने को भी कहा। उन्होंने यह भी बताया कि दिव्यांगों से संबंधित मामले को दर्ज करने के लिए पुलिस को दिव्यांगों के घर तक आना होगा।जिला में पुअर होम की जगह एक आलीशान सुविधाओं से युक्त अर्ली इंटरवेंशन सेंटर के निर्माण के संबंध में किए जा रहे प्रयास की भी उन्होंने जानकारी दी। जन वितरण प्रणाली में भी दिव्यांगों को 5% का आरक्षण मिलना है। निशक्तता आयुक्त ने 21 प्रकार के दिव्यांगताओं के बारे में जानकारी दी तथा बताया कि टेंपोरल बोन डिजीज जनित दिव्यांगता में 6 लाख रु के सरकारी अनुदान के भी प्रावधान हैं। उन्होंने बताया कि दिव्यांगों से शादी करने पर भी सरकार के द्वारा कई तरह के प्रोत्साहन दिए जाते हैं। निशक्तता आयुक्त ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कुटीर उद्योग के लिए तीन श्रेणी में 10लाख रूपए तक के कम दर पर ऋण के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के संसाधन पर पहला हक दिव्यांग जनों का है।10 दिसंबर को निशक्तता आयुक्त जिला स्तरीय विभिन्न विभागों के पदाधिकारी तथा विश्वविद्यालय एवं बैंक के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसी दिन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व मॉल का भी निरीक्षण कर दिव्यांगों को दी जा रही सुविधाओं का आकलन करेंगे। 11 दिसंबर को अस्पताल के चिकित्सकों, जनप्रतिनिधियों एवं सिविल सोसायटी, चिकित्सा विभाग, समाज कल्याण विभाग एवं विधिक सेवा प्राधिकार के साथ भी उनकी बैठक होगी। 1 2 दिसंबर को जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र दरभंगा में दिव्यांग जनों के परिवादों की सुनवाई के लिये चलंत लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। चलंत लोक अदालत में दिव्यांग जनों के लिए दिव्यांगता प्रमाणीकरण की भी व्यवस्था होगी।