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26.05.2021 (दरभंगा) : बिहार के सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में (चमकी बुखार) एईएस/जेई की तैयारी की समीक्षा को लेकर संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं 18 जिले के जिलाधिकारी के साथ ऑनलाइन बैठक की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मुजफ्फरपुर के आसपास के 09 जिले (एईएस) चमकी बुखार से तथा मगध प्रमंडल के 04 जिले गया, जहानाबाद, नवादा और औरंगाबाद के साथ नालंदा जिला जेईएस से प्रभावित रहता है। वर्ष 2019 में मुजफ्फरपुर में एईएस के सर्वाधिक मामले प्राप्त हुए थे। जिनमें कांटी प्रखंड में सर्वाधिक 96 मामले पाए गए थे। वर्तमान वर्ष में एईएस के बहुत कम कुल 21 मामले 24 मई तक आए हैं। जिनमें मुजफ्फरपुर के 6, सीतामढ़ी के पांच, बेगूसराय, पूर्वी चंपारण और पटना में दो-दो मामले, शिवहर, मधेपुरा, नालंदा और वैशाली में 01-01 मामले प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि एईएस के लिए विभाग द्वारा सभी संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सदर अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के लिए एसओपी बनाया गया है जिसका अनुश्रवण कराया जा रहा है।

अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेवल पर भी एईएस का इलाज प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा रहा है। इसके लिए सभी संबंधित जिले के चिकित्सकों, एएनएम, आशा और चिकित्सीय तकनीशियन को प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही सभी जगह एईएस के लिए दवा की किट्स उपलब्ध कराया गया है। ए ई एस का मुख्य केंद्र बिंदु मुजफ्फरपुर जिले के एसकेएमसीएच में एईएस के इलाज के लिए पीकू(PICU) में 100 बेड, एइसेफलाईटिस वार्ड में 60 बेड, एमसीएच में 100 बेड और सदर अस्पताल में 100 बेड तैयार रखा गया है। इसके अतिरिक्त सभी संबंधित जिला अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 05 -05 बेड तैयार रखा गया है। तथा संबंधित 14 जिलों में पिकू में 10-10 बेड तैयार रखा गया है। अभी तक 12 जिलों के 350 चिकित्सकों को वर्चुअल ट्रेनिंग दी गई है।

पीकू वार्ड के 39 डॉक्टर, 47 नर्स को दिल्ली, पटना एम्स द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। 846 इमरजेंसी तकनीशियन को ट्रेनिंग दी गई है। 03 माइक्रोबायोलॉजिस्ट और 04 लैब तकनीशियन (NIMHANS) निमहंस, बैंगलोर के प्रशिक्षण में भाग ले चुके हैं तथा सात शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक भी निमहंस, बैंगलोर से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त 445 एमबीबीएस डॉक्टर, 749 आयुष डॉक्टर एवं 604 पारा मेडिकल स्टाफ को मास्टर ट्रेनर के रूप में चिन्हित किया गया है। जिन्हें आकस्मिक प्रतिनियुक्ति के लिए चिन्हित किया गया है। संबंधित जिलों में 24 घंटे डॉक्टर का रोस्टर बनाकर प्रतिनियुक्त किया गया है। एईएस प्रभावित बच्चों को चिकित्सा केंद्र तक लाने के लिए निजी वाहनों के लिए भी राशि उपलब्ध कराई जा रही है। जिनमें 20 किलोमीटर तक के लिए 400 रुपये, 40 किलोमीटर तक के लिए 600 रुपये, 60 किलोमीटर तक के लिए 800 रुपये एवं अधिकतम 1000 रुपये उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कम से कम एक एंबुलेंस ए ई एस के लिए रखा गया है जो 102 नंबर पर कार्यरत है। संबंधित 12 जिलों में कुल 498 एंबुलेंस रखा गया है।

उन्होंने कहा कि बिहार के 35 जिले में जेई का टीकाकरण दिया गया है। वर्ष 2019 में एईएस के सर्वाधिक 135 मामले पाए गए थे। वर्ष 2021 में अभी तक एक भी मामले नहीं आए हैं। इसके बाद सभी संबंधित जिले जिनमें मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, समस्तीपुर, शिवहर, वैशाली, सीतामढ़ी, सारण, गोपालगंज, सिवान, गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, नवादा और नालंदा जिले के जिलाधिकारी ने अपने-अपने तैयारी से सीएम को अवगत कराया। सीएम ने वर्ष 2019 में ए ई एस से सर्वाधिक प्रभावित प्रखंड मुजफ्फरपुर के कांटी भ्रमण के दौरान पाए गए तथ्यों के आलोक में सामाजिक, आर्थिक जनगणना कराने एवं उसके आलोक में जिनके पास घर नहीं है उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री ग्राम आवास योजना अंतर्गत मकान बनवाने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने कहा कि वैसे परिवारों को घर, राशन कार्ड, नल-जल की सुविधा, उनके बच्चों को आंगनबाड़ी एवं विद्यालय की सुविधा तथा उनके जीविका के लिए सतत जीविकोपार्जन योजना का लाभ पहुंचाना अति आवश्यक है। क्योंकि भ्रमण के दौरान पाया गया था कि जिन परिवारों के पास घर नहीं है वे अपने बच्चों की देखभाल ठीक से नहीं कर पाते हैं। साथ ही अधिक गर्मी पड़ने पर घर के अभाव में बच्चे ए ई एस के चपेट में आ जाते हैं। डीएम मुजफ्फरपुर ने बताया कि वर्ष 2019 में सर्वाधिक प्रभावित पांच प्रखंड में सामाजिक, आर्थिक जनगणना के आधार पर सभी परिवारों का घर बनवा दिया गया है। बैठक में दरभंगा डीएम डॉ. त्यागराजन एस.एम ने बताया कि ए ई एस से बचाव के लिए दरभंगा में जीविका द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया है।

जिनमें 04 लाख 42 हजार महिलाओं ने भाग लिया। जीविका अपने 162 पीकू प्रोजेक्टर के माध्यम से भी व्यापक प्रचार-प्रसार कर रही है। साथ ही 50 हजार लीफलेटस का वितरण करवाया गया है। ए ई एस के लिए डीएमसीएच में 10 बेड एवं जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक-एक बेड तैयार रखा गया है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना से 289 गाड़ियों को पंचायतवार टैग किया गया है। एस ओ पी के अनुसार सभी तैयारियां की गई है दरभंगा में कालाजार के 08 मामले प्रतिवेदित है। बैठक में समाज कल्याण विभाग, के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने बताया कि एईएस प्रभावित प्रखंडों में 321 नए आंगनबाड़ी केंद्र खुलवाए गए हैं। 10 जिलों में 3204 नए आंगनवाड़ी केंद्र खुलवाए गए हैं तथा प्रभावित प्रखंडों में हाई एनर्जी डेंसिटी फूड देने की तैयारी की जा रही है।