darbhanga

26.02.2018 (दरभंगा) :ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के वीसी प्रोo सुरेन्द्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में पहला पूर्ववर्ती छात्रों का सम्मलेन समारोह का उदघाटन जुबली हॉल में किया गया।
समारोह के उद्घाटन उपरान्त चीफ गेस्ट के रूप में नेपाल के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री परमानन्द झा ने सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए कहा की भारत नेपाल के बीच आत्मीय संबंध को प्रगाढ़ बनाने के लिए प्रबुद्द लोगों को आगे आना होगा। भारत के विश्वविद्यालयों में गुणवता पूर्ण शिक्षा विश्व के किसी भी विश्वविद्यालय से कम नहीं है। विश्वविद्यालय के इतिहास में आज पहली बार पुरातन छात्रों का सम्मेलन आयोजित हुआ। जिसका उद्घाटन विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र नेपाल के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री परमानन्द झा ने किया। श्री झा ने कहा कि नेपाल में पहले शैक्षणिक संस्थानों की मधेशी कमी थी। जिसका नतीजा था कि मधेशी मूल के नागरिक पहाड़ पर जाकर शिक्षा ग्रहण करने के बजाए भारत के विश्वविद्यालयों में जाकर अध्ययन करना पसन्द करते थे। नेपाल के बच्चे अपना अध्ययन भारत, चीन, रूस के शैक्षणिक संस्थानों में करते हैं। उसमें पहली प्राथमिकता भारत रहती रही है। लेकिन आज परिस्थिति बदल गयी है। नेपाल में भी शिक्षण संस्थानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जिस वजह से अब यहाँ पर नेपाल के छात्रों की संख्या में कमी आ गयी है। उन्होंने कहा कि नेपाल में पढ़े लिखें लोगों की संख्या कम है। जिस वजह से कई तरह के समस्या हो जाती है। सामान्यतया देखा जा रहा है कि नेपाल के छात्र जिस विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययन करते हैं उनकी मानसिकता उस देश की ओर हो जाती है। इस वजह से आवश्यक्ता है कि भारत में नेपाल के अधिक से अधिक छात्र आकर पढ़े। ताकि भारत नेपाल के जो पूर्व में आत्मीय संबंध रहा है वह बरकरार रहे। नेपाल के छात्रों का भारत के विश्वविद्यालयों में अध्ययन करने का आकर्षण बना रहे इसका प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेपाल के तीस फीसदी आबादी की शादी भारतीय लड़कियों से होती रही है। संविधान में कुछ ऐसे प्रावधान कर दिए गए हैं जिससे इस तरह के संबंध में परेशानी हो रहे हैं। साथ ही सीमा पर भारत की ओर से तैनात सुरक्षा कर्मी के जाँच भी कुछ इस तरह के होते हैं, जिसका संबंध में आड़े आ रहा है। समय की पुकार है कि दोनों देशों के बीच पूर्व के संबंध को बहाल रखने के लिए प्रवुद्ध लोगों को आगे आना होगा।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए ललित नारायण मिथिला विष्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि पूर्ववर्ती छात्रों के सम्मेलन पहली बार आयोजित करने में परेशानी हुई है। लेकिन शुरूआत हुई, यह अच्छी बात है। इस विश्वविद्यालय की अपनी अलग स्थापना पहचान है। इसकी स्थापना जनक, याज्ञवल्क्य, विद्यापति जैसे मनीषियों की भूमि पर हुई है। इसका परिणाम है कि इसके वातावरण में ज्ञान व्याप्त है। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। यह विश्वविद्यालय लगातार प्रयासरत है कि यहाँ के छात्र भूमंडलीकरण के दौर में विश्व के अन्य विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ होने वाले प्रतियोगिता में सफल रहे। इसके लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। इसमें हमें सफलता भी प्राप्त हुई है। यह आज के पूर्ववर्तीछात्रों के सम्मेलन से यह पता चलता है। उन्होंने कहा कि पुरातन छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र पद्मश्री डा0 मोहन मिश्र ने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए लगातार प्रयत्न करना चाहिए। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है की अगर लक्ष्य प्राप्ति में कोई कमी हो जाए तो इसके लिए दुखी हो जाए। बल्कि लगातार प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर लक्ष्य नहीं थोपे। बल्कि बच्चों को अपना लक्ष्य स्वयं निर्धारित करने देना चाहिए।

समारोह के विशिष्ट अतिथि आई0आई0टी0 बनारस के प्रो0 कृपा शंकर सिंह ने कहा कि समाज के विकास में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस विश्वविद्यालय के पुरातन छात्रों के सम्मेलन से पता चलता है कि इस विश्वविद्यालय ने समाज के विकास में कितनी भूमिका निभायी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षकों को बहुत सम्मान प्राप्त है। साथ ही छात्र और शिक्षक के बीच संबंध काफी मधुर होते है। विश्वविद्यालय को पुरातन छात्रों को गम्भीरता से लेनी चाहिए। शहर के जाने-माने चिकित्सक तथा विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र डा0 सी0एम0 झा, डाo बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने भी सम्मलेन को सम्बोधित किया।

प्रतिकुलपति प्रो0 जय गोपाल ने कहा कि आज का यह सम्मेलन इस विश्वविद्यालय के लिए नया है। लेकिन आगे इसे और भी बेहतर तरीके से मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए दृढ प्रतिज्ञ हैं। पुरातन छात्र सह विश्वविद्यालय सिण्डिकेट सदस्य डा0 बैद्यनाथ चैधरी बैजू ने भी पुरातन छात्र सम्मेलन को आगे और भी बेहतर तरीके से मनाने की अपील की। इस अवसर पर कई पुरातन छात्रों को सम्मानित किया गया। जिसमें दरभंगा मेडिकल कॉलेज के मेडिसीन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा0 ए0के0 गुप्ता, दरभंगा के उपविकास आयुक्त डा0 कारी प्रसाद महतो, प्रो0 समीम अहमद, इन्तखाबउर रहमान, डा0 योगेन्द्र ठाकुर, नुर इस्लाम, डा0 अमरनाथ झा, डा0 के0पी0 यादव, डा0 ब्रजेश झा आदि प्रमुख थे।
आगत अतिथि का स्वागत डा0 अरुणिमा सिन्हा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा0 अनीस अहमद तथा मंच संचालन डा0 विजय मिश्र ने किया।