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01.09.2018 (दरभंगा) : दुर्लभ पांडुलिपि, पुस्तक एवं दस्तावेज के संरक्षण के लिए इस यूनिवर्सिटी में महाराज कामेश्वर सिंह सामाजिक विज्ञान संस्थान एवं शोध पुस्तकालय के अन्तर्गत पांडुलिपि संरक्षण केंद्र एवं पांडुलिपि संसाधन केंद्र की स्थापना के निमित्त राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन, नई दिल्ली के साथ संधि पत्र पर हस्ताक्षर कर एल.एन.एम.यू ने बड़ा कदम उठाया। इस उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेते हुए राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के निदेशक डॉ० प्रतापानन्द झा ने मिथिला विश्वविद्यालय की इस महती कार्य के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने पांडुलिपि संरक्षण के साथ साथ पांडुलिपि प्रकाशन में भी सहयोग का आश्वासन दिया। विशिष्ट अतिथि संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा के निदेशक डॉ० देवनारायण यादव ने संस्थान में 1000 वर्ष पुराने 12500 पांडुलिपि होने की जानकारी दी। उन्होंने इस कार्य में पूर्ण सहयोग का आश्वाशन दिया।

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प्रतिकुलपति प्रो० जयगोपाल ने नई जिम्मेदारी को निभाने के लिए संस्थान के निदेशक को योजनाबद्ध रूप में कार्य करने की सलाह दी तथा लक्ष्य निर्धारित कर संसाधन विकसित करने की राय दी। अपने अध्यक्षीय उद्धबोधन में कुलपति प्रो० सुरेन्द्र कुमार सिंह ने दरभंगा के महाराजा द्वारा विश्वविद्यालय को दुर्लभ पांडुलिपि एवं पुस्तक के रूप में दी गई अमूल्य धरोहर की रक्षा के लिए मिशन को योगदान के लिए साधुवाद दिया। पावर प्वाइंट के माध्यम से संतोष कुमार झा ने राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के तत्वावधान में फरवरी 2018 में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला से लेकर आज संधिपत्र हस्ताक्षर होने तक मिशन के अविस्मरणीय सहयोग को रेखांकित किया। कुलसचिव निशीथ कुमार राय ने मुख्य अतिथि से पांडुलिपि संरक्षण के साथ-साथ विश्वविद्यालय को राज दरभंगा से प्राप्त भव्य इमारतों की भी रक्षा में सहायता करने हेतु अनुरोध किया।