March 08, 2019

07.03.2019 (दरभंगा) : (MSU) मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने मिथिला विकास बोर्ड सम्बन्धी मांग को लेकर डीएम त्यागराजन एस एम को ज्ञापन सौंपा। विस्तृत ज्ञापन के माध्यम से बताया गया की मिथिला डेवलपमेंट बोर्ड (MDB) क्षेत्र के 20+ पिछड़े जिलों की जरूरत और वाज़िब हक़ है। देश के सबसे पिछड़े जिलों की लिस्ट में अररिया, कटिहार, पूर्णिया, बांका, जमुई, बेगुसराय, शिवहर, खगरिया, सुपौल, किशनगंज आदि का नाम सबसे ऊपर आता है। एक आम मैथिल सलाना अन्य जगह के एक औसत भारतीय का एक तिहाई कमाता है। कैपिटा इनकम की दृष्टि से एक मैथिल किसी औसत मराठी का चौथाई, गुजराती का पांचवां, दिल्ली का दशवां, केरला का छठवाँ हिस्सा कमाता है। मिथिला क्षेत्र के जिलों का जीडीपी पर कैपिटा नोर्थईस्ट राज्यों के औसत से भी लगभग आधा है। सेपरेट डेवलपमेंट बोर्ड फ़ॉर मिथिला एक ऐसा विचार है हमारे हिसाब से जो मिथिला के वर्तमान राजनीतिक, आर्थिक, वास्तविक और विकास की हालात एवं जरूरत पर एकदम फिट बैठता है। अभी हाल में ही प्रेसिडेंट ने हैदराबाद-कर्नाटक के 6 पिछड़े जिलों के लिए एक डेवलपमेंट बोर्ड के गठन की मंजूरी दी है। गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन भी कुछ ऐसे ही फंक्शन करता है। मिथिला में डेवलपमेंट बोर्ड क्षेत्र के २०+ जिलों के लिए विशेष विकास प्रोजेक्ट्स तैयार कर सकती है। जिससे की बाढ़ जैसे समस्या के निदान के लिए अपना डेवलपमेंट बोर्ड रहेगा तो जरूर इसपर ठीक से काम किया जा सकता है। मिथिला का लोक-कला, संस्कृति, भाषा-इतिहास और पर्यटन मिलकर एक बड़ा इंडस्ट्री बन सकता है।
प्रतिनिधिमंडल में शिवेंद्र वत्स, बिहार प्रभारी प्रियरंजन पांडेय, गोपाल चौधरी, उपस्थित थे।