October 18, 2020

13.10.2020 (दरभंगा) : ख्यातिलब्ध पत्रकार रामगोविन्द प्रसाद गुप्ता की 85वीं जयंती के अवसर पर " असमान्य परिस्थितियों में जनचेतना एवं पत्रकारों की भूमिका " विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ट सामाजिक चिंतक एवं पूर्व विधान पार्षद डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि मीडिया पर बाजार का नियंत्रण स्थापित हो चुका है। नतीजन पत्रकारों के समक्ष विविध प्रकार की मजबूरियां उपस्थित है। अभी कोरोना जैसे असमान्य परिस्थितियों में पत्रकारों ने अहम भूमिका निभाई है और उसी का परिणाम है कि आज हर कोई कोरोना से सावधान है। उन्होंने कहा की मीडिया को अपनी विश्वसनीयता बरकरार रखने के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन सर्वश्रेष्ठ ढ़ंग से करना होगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को समाज में सद्भावना और प्रेम बना रहे इसके लिए सामाजिक नहीं शारीरिक दूरी बनाने के लिए आम लोगों को जागरूक करने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक दूरी से समाज में विद्वेष फैलता है और आज इसी कारण से समाज एवं परिवार टूटने के कगार पर पहूंच गया है। वैश्विक महामारी कोरोना के लोग सिर्फ अपने में सिमट कर रह गया हैं वह अपने वृद्ध माता-पिता एवं संबंधियों तक को भी भुला दिया है।
ल.ना. मिथिला विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ट चिंतक डॉ. जितेन्द्र नारायण ने कहा कि सामाजिक जीवन में प्राकृतिक आपदाओं को छोड़कर अधिकांश असमान्य परिस्थितियों की उत्पत्ति मनुष्य की स्वार्थी प्रवृति के कारण होती है। आज स्वार्थ भाव इतना प्रबल हो गया है कि लोग अपने दायित्व का निर्वहन पवित्र भाव से नहीं करते है। लाभ हर जगह हावी हो गया है जिसके कारण कभी-कभी असमान्य परिस्थितियां विकट और विकराल हो जाती है। भारत में आजादी पूर्व से ही पत्रकारिता जनचेतना को जगाती रही है तथा जनमत निर्माण में भी इसका अहम योगदान रहा है। पर उस समय की सरोकार रूपी पत्रकारिता वर्तमान दौर में स्वार्थ से प्रभावित हो चुकी है। इसके कारण पत्रकार भी आरोप-प्रत्यारोप के खेल में शामिल होकर वास्तविकता को संदेहप्रद बना देते है। यह प्रवृति समाज के लिए घातक है क्योंकि समाजिक चेतना जगाने का अंतिम दायित्व पत्रकारों का है और इसमें गिरावट से समाज-राष्ट्र सीधे तौर पर प्रभावित होता है। पत्रकारों का धर्म तटस्थ रहकर समस्या के निदान के प्रति समाज को जागृत करना ही है।
इससे पूर्व विषय प्रवेश करवाते हुए एम.एल.एस.एम कॉलेज के हिंदी विभाग के शिक्षक एवं साहित्यकार डॉ. सतीश कुमार सिंह ने कहा कि पत्रकारों की अभिव्यक्ति असल में आमलोगों की अभिव्यक्ति होती है। इसलिए असमान्य परिस्तिथियों में पत्रकारों की जवाबदेही बढ़ जाती है। पत्रकारिता का धर्म कहता है कि बिना किसी खास विचारधारा से प्रभावित हुए आमलोगों की भावनाओं और वास्तविकता को उजागर करना ही पत्रकारिता है। पत्रकारों को चाहिए कि वे मानवता हित में अपने धर्म का निर्वहन करें। कोरोना संक्रमण के दौर में पत्रकारों ने अपनी भूमिका का सटीक निर्वहन किया है।
डॉ. अमरनाथ कुंवर ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि जनचेतना निर्धारण में पत्रकारिता की अहम भूमिका रही है। अभी कोरोना महामारी जैसी असमान्य परिस्थितियों में पत्रकारों ने जैसा कार्य किया है वैसा ही कार्य पत्रकारों को सामाजिक समस्याओं के असमान्य होने पर भी करना चाहिए।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए एम.एल.एस.एम कॉलेज के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ट पत्रकार डॉ. कृष्ण कुमार झा ने कहा कि विपरित परिस्थितियों में ही व्यक्ति की पहचान होती है। असामान्य परिस्थिति में जनचेतना को सही दिशा देने की जिम्मेवारी जब पत्रकारों पर आती है तभी उनका निखरा स्वरूप भी समक्ष आता है। कोरोना जैसी महामारी के दौर में पत्रकारिता अपने मापदंडों पर खरी उतरी है, परंतु कई ऐसी असामान्य सामाजिक परिस्थितियां नजर आयी है जिससे पत्रकारिता का विकृत स्वरूप सामने आया है। असामान्य परिस्थितियों से पत्रकारों का चोली-दामन का साथ होता है और ऐसी परिस्थितियां ही पत्रकारिता की महत्ता को भी सार्थकता देती है। संगोष्ठी की शुरुआत स्व. रामगोविंद प्रसाद गुप्ता की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर अतिथियों ने किया तथा डॉ. ए.डी.एन सिंह के ओजस्वी संचालन में अतिथियों का स्वागत प्रदीप गुप्ता ने किया। जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रमोद कुमार गुप्ता ने दिया।