
21.06.2019 (दरभंगा) : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किये गए। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रशासनिक भवन के सामने पोर्टिको में आयोजित योग दिवस के अवसर पर कुलपति प्रोo एस.के. सिंह ने कहा की योग स्वस्थ मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी और मूल्यपरक है। उन्होंने कहा की योग मानव जीवन की सूक्ष्मआत्मा है। योग के द्वारा केवल तन ही स्वस्थ नहीं रहता बल्कि मन भी स्वस्थ और प्रसन्नचित्त रहता है। स्वस्थ तन मन से ही स्वस्थ विचार और चिंतन का विस्तार संभव है। हमें प्रतिदिन योग के लिए कुछ समय अवश्य निकालाना चाहिए। योग प्रशिक्षक श्री राम विनोद ठाकुर ने योग प्रशिक्षण का आरंभ ऊं शब्द के उच्चारण के साथ किया। योग प्रशिक्षण के द्वारा पवन मुक्त आसन, तितली आसन, गोमुखासन, भुजंगासन,सूर्य नमस्कार, स्वास्तिक आसन, योग निद्रा, नाड़ी शोधन, प्राणायाम आसन आदि किया गया।

DMCH ऑडिटोरियम में आयोजित अखिल विश्व योग यात्रा कार्यक्रम में योग विशेषज्ञ डॉ निर्भय शंकर भारद्वाज ने ध्यान योग एवं योग निद्रा का अभ्यास कराया तथा अतिथियों को गमले में पौधा और गीता की गुटका देने के पीछे के उद्देश्य के संबंध में बताया कि प्रकृति के क्षरण पर वृक्ष ही विराम लगा सकता है तथा कर्तव्य का बोध कराती है। गीता कर्म के प्रति तत्परता लाती है। डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राज रंजन प्रसाद ने कहा कि योग से हम आध्यात्मिकता की और अग्रसर होते हैं। नित्य योग का अभ्यास शारीरिक मानसिक दोनों ही दृष्टिकोण से मनुष्य को सबल बनाता है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोo एस.के. सिंह ने योग के नित्य अभ्यास का आवाहन किया तथा योग के अनुकूल प्रभास के बारे में बताया। उन्होंने कहा की जीवन में योग को आत्मसात करने से हम निरंतर प्रगति को प्राप्त करेंगे तथा सकारात्मक भाव का उदय होगा जिससे समाज में व्यापक बदलाव आएगा।

सी.एम. साइंस कॉलेज दरभंगा में योग सत्र का आयोजन प्रभारी प्रधानाचार्य डॉo अशोक कुमार झा की अध्यक्षता में किया गया। योग प्रशिक्षक कुमार अनुराग ने अत्यंत ही रोचक तरीके से योग को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में कड़ी धूप के बावजूद छात्र अत्यंत ही उत्साहित होकर योगासन सीख रहे थे। योग सत्र को संबोधित करते हुए प्रभारी प्रधानाचार्य डॉo अशोक कुमार झा ने छात्रों से अपने दैनिक जीवन में योग को शामिल करने की अपील की। डॉo अजय मिश्र ने योग और प्राणायाम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्तित्व के विकास में योग सर्वाधिक सहायक है। यह मनुष्य के नैतिक, चारित्रिक एवं आध्यात्मिक उत्थान हेतु अनिवार्य है।

लहेरियासराय स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में आयोजित योग दिवस के अवसर पर श्री मयंक वरवड़े, आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय में सिखाया जाने वाला राजयोग लोगों को तनाव और चिंताओं से मुक्त करता है। उन्होंने कहा की मेडिटेशन से हम तन मन को स्वस्थ रख सकते हैं। दरभंगा के महापौर श्रीमती बैजंती खेड़िया ने अपने उद्बोधन में ब्रह्माकुमारी के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा की मेडिटेशन आज लोगों का आवश्यक अंग बन गया है। संस्था के संचालिका बी.के आरती बहन ने योग के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि राजयोग मेडिटेशन शारीरिक एक्सरसाइज नहीं है। यह मानसिक एक्सरसाइज है जिससे हम स्वयं को तनाव मुक्त व खुश रह सकते हैं। उन्होंने कहा की राजयोग में जब हम खुद को परमात्मा से जोड़ते हैं तो हमारे अंदर की आंतरिक शक्तियों का विकास होता है और हम स्वयं को नकारात्मक विचारों से अलग कर सकारात्मक विचारों में संलग्न कर सकते हैं। मंच संचालन करते हुए बी.के सुधाकर भाई ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग 2015 से शुरू हुआ और आज 5वे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विश्व के कोने-कोने में फैल गया है। उन्होंने इसके लिए भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद दिया।

प्रमंडलीय वाणिज्य एवं उद्योग परिषद एवं लॉयन्स क्लब दरभंगा टाउन की और से श्री कृष्ण रेजीडेंसी में आयोजित योग शिविर में चैम्बर के अध्यक्ष पवन कुमार सुरेका ने सबों का स्वागत किया। डाo अशोक कुमार शर्मा, अपर आयुक्त, राज्य कर ने शिविर का उद्घाटन करते हुए कहा की शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का विज्ञान है योग। रोग को देश से दूर भगाए, आइए विश्व योग दिवस मनायें। आर्ट ऑफ लिविंग के अनिल शर्मा और श्रृष्टि ने विभिन्न प्रकार के योग और प्राणायाम दो घंटे तक उपस्थित लोगो को करवाया।

नृत्य जीवन के लिए योग की महता नितांत आवश्यक है। भारतीय नृत्य में योग तन-मन और आत्मा की शुद्धिकरण का एक मात्र मंत्र है। नृत्य में योग अंत: शरीर व बाह्य शरीर की यात्रा को प्रारंभ करने का माध्यम है। योग से जीव परम शांति की अनुभूति कर सकता है। नृत्य और योग दोनो एक साथ करने से मानसिक आनन्द की अनुभूति होती है। उक्त बातें सृष्टि फाऊंडेशन के द्वारा आयोजित अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व संध्या पर दरभंगा पैलेस परिसर में मुख्य अतिथि के रूप में डॉo लावण्या कृति सिंह काव्या संकायाध्यक्ष संगीत विभाग, विशिष्ट अतिथि के रूप में विशाल गौरव एवं अध्यक्षता माननीया रीता सिंह सहायक प्राध्यापक शिक्षा विभाग कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा ने कही। कार्यक्रम में योगगुरु श्री पवन सिंह एवं उपासना सिंह ने योग की बारीकी एवं योगाभ्यास कराया। आगत अतिथियों ने अपने सम्बोधन में कहा कि नृत्य एवं योग से ही परमानंद की प्राप्ति की जा सकती है। नृत्य और योग दोनों ही तन-मन से ऊपर ऊर्जा शरीर में प्रवेश का मार्ग है। नृत्य या योग करने से मन और तन एक होते है।

योग मानव जीवन को उत्कृष्टता प्रदान कर कार्यकुशलता बढ़ाता है। यह हजारों वर्ष पूर्व भारत द्वारा खोजी गई श्रेष्ठ जीवन-पद्धति है, जो विश्व को भारत की महत्त्वपूर्ण देन है। योग हमें 'जियो और जीने दो' की प्रेरणा देता है। उक्त बातें स्थानीय एम. एल. एस. एम. कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो विद्यानाथ झा ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर एपेक्स फाउंडेशन, दरभंगा तथा भारत विकास परिषद् , विद्यापति शाखा, दरभंगा के संयुक्त तत्वाधान में विद्याभवन, दिग्घी पश्चिम में आयोजित योग के महत्व पर आयोजित संगोष्ठी का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि योग हमारी संस्कृति की देन है, जो मानव को स्वस्थ तन और मन प्रदान करता है। मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय वाणिज्य एवं प्रबंधन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बी.बी.एल दास ने कहा कि योग हमारे अंदर चेतना जागृत करता है। आज पूरा विश्व योग के महत्व को स्वीकार रहा है। योग से हमारे शरीर के पांच तत्वों में संतुलन बनता है, जिससे हमारा शरीर संतुलित एवं पुष्ट होता है। मन प्रसन्न होता है तथा हमारी आध्यात्मिक उन्नति होती है। योग को अपने जीवन में अपनाकर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।