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31.10.2018 (DarbhangaOnline Desk) : बिहार की पहचान इसकी सांस्कृतिक विरासत है। अंतर विश्वविद्यालय सांस्कृतिक महोत्सव ‘तरंग’ बिहार की कला-संस्कृति की विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। उक्त उद्गार, महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति श्री लाल जी टंडन ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में आयोजित पाँच दिवसीय बिहार अंतर विश्वविद्यालय सांस्कृतिक महोत्सव ‘तरंग-2018’ का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किये। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री टंडन ने कहा कि आज भारतीय संस्कृति का पुनरूत्थान हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े रहते हुए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शामिल होना चाहिए। राज्यपाल ने मिथिला की गौरवमयी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक एवं साहित्यिक परम्परा का सादर स्मरण करते हुए कहा कि यह भूमि राजा जनक, याज्ञवल्क्य, कपिल, कणाद, गौतम, मंडन, उदयनाचार्य, गार्गी, मैत्रेयी, भामती, भारती जैसी मनीषी प्रतिभाओं की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि है। उन्होंने कहा कि धर्म, अध्यात्म, दर्शन, शिक्षा, संस्कृति, कला, संगीत आदि सभी क्षेत्रों में मिथिला की प्रतिभाओं ने भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। राज्यपाल ने कहा कि विभिन्न अभावों एवं विसंगतियों के बावजूद हमें बराबर नवसृजन हेतु तत्पर रहना चाहिए। श्री टंडन ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि ‘तरंग’ के अन्तर्गत 27 प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि तरंग के अन्तर्गत इतनी अधिक स्पर्धाएँ पहली बार आयोजित हो रही हैं। राज्यपाल ने संतोष व्यक्त किया कि उनकी परिकल्पना के अनुकूल राज्य में उच्च शिक्षा के विकास हेतु सार्थक प्रयास शुरू हो गये हैं, जिसके बेहतर नतीजे भी आगामी वर्ष से दिखने लगेंगे। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक और खेलकूद की गतिविधियों के विकास हेतु भी राज्य के विश्वविद्यालयों में लगातार कार्यक्रम आयोजित करने के निदेश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही बोधगया में खेलकूद की अंतर विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिता ‘एकलव्य’ आयोजित होगी।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरंभंगा के कुलपति प्रो॰ सरेन्द्र कुमार सिंह ने महामहिम का स्वागत करते हुए कहा कि कुलाधिपति महोदय ने पहली बार मिथिला की धरती पर पधारकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ायी है। डॉ. सिंह ने कहा कि ‘तरंग’का यह आयोजन सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर शिक्षा के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि ‘तरंग’ और ‘एकलव्य’ जैसे कार्यक्रम छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए सिविल सोसाईटी का भी सहयोग लिया जाना चाहिए। श्री सिंह ने कुलाधिपति की दूरदर्शिता की चर्चा करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सत्र-2018-19 के समाप्त होते-होते बिहार के विश्वविद्यालयों के सत्र नियमित हो जाएँगे। उद्घाटन सत्र को ए॰आई॰यू॰ के संयुक्त सचिव सैम्सन डेविड ने संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की निरंतर सहभागिता रही है, इसलिए यहाँ ‘तरंग’ का आयोजन सुव्यवस्थित रूप में संभव हो सका है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ एस॰के॰ सिंह ने मिथिला की परम्परा के अनुरूप महामहिम एवं मंचासीन अन्य अतिथियों को पाग, चादर एवं प्रतीक-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।

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राज्यपाल ने कार्यक्रम के दौरान आयोजन से जुड़ी ‘स्मारिका’ का भी विमोचन किया। विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाट्य विभाग की छात्राओं द्वारा राष्ट्रगान एवं विश्वविद्यालय का ‘कुलगीत’ प्रस्तुत किया गया। कुलसचिव कर्नल (से॰नि॰) निशीथ कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उदघाटन सत्र में प्रतिभागी विश्वविद्यालयों की आंचलिक विशेषताओं को दर्शाते हुए आकर्षक रंगमय झाकियाँ भी निकाली गयीं, जिनकी मुक्त कंठ से सबों ने प्रशंसा की।

‘तरंग’ के उद्घाटन के अवसर पर दरभंगा नगर विधायक संजय सरावगी, विधान पार्षद डॉ. दिलीप कुमार चौधरी, पूर्व विधान पार्षद डॉ. विनोद कुमार चौधरी, बी॰आर॰ए॰ बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, बी॰एन॰एम॰यू॰, मधेपुरा, के॰एस॰डी॰एस॰यू॰ दरभंगा, मौलाना मजहरूल हक़ अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति समेत कई विश्वविद्यालयों के प्रतिकुलपति, कुलसचिव एवं अध्यक्ष, छात्र कल्याण आदि उपस्थित थे।