darbhanga

02.12.2018 (दरभंगा) : मिथिला विकास बोर्ड की मांग को लेकर विशाल जनसभा का आयोजन संकल्प रैली के रूप में दरभंगा राज मैदान में किया गया। मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित राष्ट्रीय संगठन मंत्री अविनाश भारद्वाज ने कहा की यहाँ पच्चास हजार नौजवान आएँ हैं जिसके आंखों में समृद्ध मिथिला का सपना देखा जा सकता है। उन्होंने कहा की मिथिला के नौजवान अब अपनी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं करेगा। आखिर यह कौन सी व्यवस्था है जिसमें सात करोड़ मैथिलों की पूछ नहीं है। यहाँ के शिक्षा व्यवस्था की हालात दयनीय है। स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। किसान दाने-दाने को तरस रहें हैं। नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा है। पटना की सत्ता हो या फिर दिल्ली की उसमें हम मिथिलावासियों की भागीदारी 7 करोड़ है, लेकिन हमारी पूछ क्यों नहीं है। इसी के विरोध में आज हजारों नौजवान यहाँ अपना अधिकार मांगने आए है। सशक्त समृद्ध मिथिला के परिकल्पना को साकार करने आये हैं।

यूनियन के राष्ट्रीय अध्य्क्ष रौशन मैथिल ने कहा कि यह हजारों की भीड़ मिथिला के गाँव-गाँव से खुद चल कर आई है। इनका एक ही मांग है कि मिथिला विकास बोर्ड के माध्यम से केंद्र सरकार एक लाख कड़ोर मिथिला के विकास के लिए इस क्षेत्र में ख़र्चा करें। यहाँ स्पेशल एजुकेशन जोन बनाया जाए। उच्च शिक्षा की व्यवस्था हो चुकी यह विद्वानों की धरती है। उन्होंने कहा की मिथिला में बन्द पड़े 14 चीनी मिल अगर चालू हो जाए तो 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। यह कृषि पर निर्भर क्षेत्र है और कृषि में एक मात्र नगदी फसल है। गन्ना की खेती अगर होती है तो यहां के किसान समृद्ध होगें जो आदिकाल में थे। उनोने IT पार्क, IIT, तारामंडल, एयरपोर्ट तथा दरभंगा के तीनों तालाबों को एक-एक कर पर्यटन स्थल बनाने की मांग की। मधुबनी में केंद्रीय विद्यालय एडवेंचर पार्क, झंझारपुर को जिला का दर्जा, बेगूसराय में LNMU का एक बेंच, पूर्णियां, सुपौल, अररिया खगड़िया जैसे अति पिछड़े जिला को 5-5 हजार करोड़ कार्पस प्रदान करने की मांग की। समस्तीपुर से दिल्ली भेज दिए गए पूसा एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर को फिर से समस्तीपुर में स्थापित करने की भी मांग।

राष्ट्रीय महासचिव आदित्य मोहन ने कहा कि आज सात करोड़ की आबादी एक डीएमसीएच पर निर्भर है, जिसकी हालात खुद वेंटिलेटर पर है और किसी से छुपी हुई नहीं है। सरकार जब पटना में AIIMS बनाती है तो अलग जगह बनाती है। ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। हज़ारों की संख्या में रोजगार का सृजन हो। लेकिन जब मिथिला में एम्स की बारी आती है तो DMCH को अपग्रेड की बात करने लगते है। अरे आपने PMCH को अपग्रेड क्यों नहीं किया ? वहाँ अलग से एम्स बनाया सरकार ने, वहाँ पैसा खर्च किया।

वरिष्ठ छात्र नेता सागर नवदिया ने कहा कि मिथिला के विश्वविद्यालयों की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है। प्रथमिक स्तर पर या फिर मध्य या उच्च स्तर पर शिक्षा को सरकार जान बूझकर ठीक नहीं कर रही है। यहाँ के डिग्रियों की कोई मूल्य नहीं है। विश्वविद्यालय अध्यक्ष अमन सक्सेना व' बिहार प्रभारी प्रियरंजन पांडे ने कहा कि अगर मिथिला विकास बोर्ड की माँग पूरी नहीं होती है तो संघर्ष को तेज किया जायेगा।