November 13, 2019

12.11.2019 (दरभंगा) : मिथिला कला रक्षा संकल्प हेतु आयोजित मिथिला चित्रकला प्रतियोगिता-2019 का आयोजन विद्यापति सेवा संस्थान द्वारा आयोजित 47वाँ मिथिला विभूति पर्व समारोह-2019 में हुआ। देश विदेश के मिथिलाप्रेमी और मिथिला चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेनेवाले प्रतिभागियों के समक्ष इसके परिणाम की घोषणा की गई। प्रथम पुरस्कार के रूप में 21000/- की राशि के साथ सम्मानपत्र मेहसौल, सीतामढ़ी के श्रीमती लक्ष्मी कुमारी को दिया गया। प्रथम पुरस्कार मैथिल मंच के संरक्षक श्री ताराकांत मिश्र , गोढ़ैला , बिशनपुर द्वारा अपने पिताजी स्व. सदानंद मिश्र जी की स्मृति में दिया गया। द्वितीय पुरस्कार के रूप में 11000/- की राशि के साथ सम्मानपत्र मिर्जापुर, दरभंगा के श्री भगवान ठाकुर को दिया गया। द्वितीय पुरस्कार डा. रानी झा, आरती झा, और कंचन झा संयुक्त रूप सँ अपन सासु माँ स्व. चन्द्रकला देवी की स्मृति में दिया गया। तृतीय पुरस्कार के रूप में 5100/- की राशि के साथ सम्मानपत्र पुणे, महाराष्ट्र की श्रीमती पूजा झा को दिया गया। तृतीय पुरस्कार मैथिल मंच के संरक्षक श्री हेमन्त झा अपने पिता स्व. राधाकांत मिश्र ग्राम गम्हरिया, बेनीपट्टटी मधुबनी की स्मृति में दिया गया। मिथिला विभूति पर्व में सृष्टि फाउंडेशन के कलाकारों ने भी समा बांधा।

कवि कोकिल विद्यापति के निर्वाण दिवस पर विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा द्वारा आयोजित त्रि-दिवसीय मिथिला विभूति पर्व समारोह के समापन समारोह मे रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उड़ीसा तक में अपनी पहचान बना चुकी बिहार की प्रख्यात नृत्य संस्थान सृष्टि फाउंडेशन द्वारा नृत्य-नाटिका के रूप में "गीता" की प्रस्तुति की गई। इस ओडिसी नृत्य के माध्यम से गीता के उपदेश की प्रस्तुति हुई।
जिसके माध्यम से बताया गया कि एकादशी तिथि रविवार के दिन कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को लगभग 45 मिनट तक कर्तव्य व धर्म एवं ज्ञान की बातें सुनाए थे। जिसमें ज्ञान, भक्ति व कर्म-योग के मार्गों पर विस्तृत चर्चा की गई है। इन्हीं मार्गों पर चलकर व्यक्ति निश्चित रूप से परमपद का अधिकारी बन जाता है। नृत्य में भगवान श्री कृष्ण की भूमिका में सृष्टि फाउंडेशन के संस्थापक गुरु जयप्रकाश पाठक स्वयं, अर्जुन की भूमिका में नयन कुमार माझी, ब्रह्मा की भूमिका में सुबोध दास, तथा सोनाधारी सिंह, स्वर्णम उपाध्याय, रुबी गुप्ता, कोमल माझी, रितिका कुमारी ने अपनी प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह को भक्तिमय कर दिया। नृत्य नाटिका के माध्यम से यह भी बताया गया कि गीता का पावन ज्ञान सबसे पहले सुर्यदेव को प्राप्त हुआ था और गीता में भगवान श्री कृष्ण ने 574, अर्जुन ने -85, धृतराष्ट्र ने- 01 और संजय ने -40 श्लोक कहे थे ।