March 11, 2021

08.03.2021 (दरभंगा) : विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर गृह विज्ञान विभाग में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन विभागाध्यक्ष डॉ० दिव्या रानी हंसदा के नेतृत्व में किया गया। जिसमें विश्वविद्यालय के कई विभागों की छात्राएँ शामिल हुई।
इस मौके पर विश्वविद्यालय की प्रतिकुलपति महोदया व मुख्य अतिथि प्रो० डॉली सिन्हा ने कहा कि चुनौती से डरे नहीं बल्कि उससे सामना करना सीखें हमारी छात्राएं। कोई भी लक्ष्य आपके साहस के आगे में बड़ा नहीं है। महिलाएं को अपने अधिकार के प्रति जागरूक होना होगा। आज कई महिलाओं ने समाज के सामने खुद को साबित किया है। समाज ने उनका लोहा माना है। आप देश-विदेश के प्रतिष्ठित पदों पर विराजमान हों ऐसा मेरा शुभकामना है। संघर्ष कहाँ नहीं है, बिना संघर्ष के व्यक्ति निखरता नहीं बल्कि बिखरता है। संघर्ष के बाद मिले पद व स्थान का अपना एक अलग अहमियत है। संघर्ष से मिला पद व स्थान आपके विचारों को, आपके व्यवहारों को निखारता है। हमारा प्रतिस्पर्धा कभी पुरुषों से नहीं रहा है। समाज निर्माण में किन्हीं की भूमिका को नकार नहीं सकते हैं, वो पुरुष भी मेरा ही बेटा, पिता, भाई व पति है।
आगे उन्होंने कई सफल महिलाओं की प्रेरणात्मक कहानी सुनाई और कहीं कि अगर आप में कुछ करने की जोश व जज्बा होगा तो आपके लिये कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं है। आप उस दिन जरूर सशक्त हो जाएंगी जिस दिन आप अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो जाएंगी। विशिष्ट अतिथि श्रीमती मालती सिंह ने कहा कि प्राचीन भारत, मध्य कालीन भारत व आधुनिक भारत में महिलाओं की अलग-अलग स्थिति थी। सीता व द्रौपदी दैवीय अंश का रूप थी, जैसा कि मान्यता है। सीता व द्रौपदी का जीवन बस एक अवतार था। इसीलिए उनके जीवन से सीख लेनी चाहिये कि कैसे संघर्ष का उन्होंने सामना किया है। मध्यकालीन भारत में स्त्रियों के अधिकारों का जरूर हनन व शोषण हुआ है लेकिन आज 21 वीं सदी का भारत लोकतंत्र का है। लोकतंत्र में सबों को समानता का अधिकार है। बस अपने अधिकारों को पहचानिये। अपने समय का सदुपयोग करिये। जैसे सूर्य के किरण को रोका नहीं जा सकता है। वैसे अगर आप में प्रतिभा होगा तो आपकी चमक स्वतः जग में बिखरेगी।
विभागाध्यक्ष प्रो० दिव्या रानी हंसदा ने कहा कि हम सदैव इस दिशा में प्रयत्नशील हैं कि हमारी छात्राएं "जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर" बने। मेरा लक्ष्य है कि हमारी छात्राओं का सर्वांगीण विकास हों। समय दर समय आगे भी कार्यक्रम आयोजित होती रहेंगी ताकि आप ज्यादा से ज्यादा स्किल्ड हों। हमारी पूंजी हमारी छात्राएं हैं। आप शिक्षित होंगी तो परिवार शिक्षित होगा। परिवार शिक्षित होगा तो समाज शिक्षित होगा और समाज शिक्षित होगा तो राष्ट्र शिक्षित होगा। इसीलिए राष्ट्र की नींव आप महिलाओं पर टिकी हुई हैं। सरकार आपके सशक्तिकरण के लिये विभिन्न स्कीम चला रही हैं। आपका सशक्तिकरण तभी होगा जब आप अपने अधिकार के प्रति जिज्ञासु होंगी।
मंच संचालन विभागीय शिक्षिका डॉ० प्रगति ने किया। इस मौके पर विभाग की सभी शिक्षिका डॉ० अपराजिता, डॉ० एन० चंदा, डॉ० श्वेता, श्रीमती उषा झा व शिक्षकेत्तर कर्मचारी नवीन कुमार उपस्थित थे। इस मौके पर विभिन्न विभागों की शिक्षिका भी उपस्थित थी जिसमें मानविकी संकाय की संकायाध्यक्ष सह मैथिली की विभागाध्यक्ष डॉ० प्रीति झा, संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ० ममता रानी ठाकुर, अंग्रेजी की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ० अरुणिमा सिन्हा, डॉ० पुनीता झा, समाजशास्त्र की डॉ० मंजू झा, डॉ० सारिका पांडे, डॉ० लक्ष्मी कुमारी, जंतु विज्ञान की डॉ० पारुल बनर्जी व संस्कृत विभाग की डॉ० ममता स्नेही उपस्थित थी। अंत में 1 मार्च से 6 मार्च के बीच आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के प्रथम, द्वितीय व तृतीय विजेता को प्रशस्ति पत्र व मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।