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20.06.2020 (दरभंगा) : बदलते हुए वैश्विक परिवेश में जहां हम सब अपने जींदगी की दौड़ में काफी तेज भाग रहें हैं। चकाचौंध भरी इहलौकिक भ्रम में अपने मूल को भी नजरंदाज करना पर रहा है। इस आपा-धापी में जब हमारा जीवनशैली काफी व्यस्त हो चुका है तब योग सर्वश्रेष्ठ विकल्प है जो जींदगी में संतुलन बनाए रख सकता है। अतएव हमारे दिनचर्या में योग परम आवश्यक। क्योंकि यह योग ही है जो हमारे जीवन से जुड़े भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक, आदि सभी पहलुओं पर काम करता है। वहीं भारतीय शास्त्रीय नृत्य में योग तन,मन, और आत्मा की शुद्धिकरण का एक मात्र मंत्र है। नृत्य में योग अंत: शरीर व बाह्य शरीर की यात्रा को प्रारंभ करने का माध्यम है।

योग से जीव परम शांति की अनुभूति कर सकता है। नृत्य और योग दोनों एक साथ करने से मानसिक आनन्द की अनुभूति होती है। उक्त बातें सृष्टि फाऊंडेशन के द्वारा आयोजित अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व संध्या पर दरभंगा के नौ-लखा पैलेस, संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो.श्रीपति त्रिपाठी कुलानुशासक, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा ने कहा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में शिव किशोर राय ने योग के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित किया। प्रोफेसर अनिल कुमार चौधरी ने योग और विज्ञान को जोड़ते हुए इसकी महत्त्व पर चर्चा किया। सोशल डिस्टेंस का पूर्णतः पालन करते हुए किये गए कार्यक्रम जिसका प्रसारण आनलाइन भी किया गया जिसकी शुरूआत गलवान घाटी में शहीद हुए वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देने से हुई। तत्पश्चात योगगुरु पवन सिंह एवं उपासना सिंह ने योग की वारीकियों से अवगत कराते हुए आगन्तुकों को भुजंगासन, चक्रासन, धनुरासन, शलभासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन इत्यादी का योगाभ्यास भी कराया। आज के कार्यक्रम की शुरुआत गोस्वामी गीत , जय जय भैरवी असुर भयावन पर सृष्टि फाउंडेशन की छात्रा प्रियांशी मिश्रा के एकल नृत्य से हुआ। तत्पश्चात जयति योग विद्या पर सृष्टि फाऊंडेशन की ओर से ऋचा कुमारी, कोमल मांझी, स्वर्णम उपाध्याय ने योग आधारित ओडिसी नृत्य की प्रस्तुती से दर्शकों का मन मोह लिया।