November 22, 2018

19.11.2018 (पटना) : बिहार की समृद्धि का आधार कृषि-व्यवस्था है। राज्य में कृषि का विकास तभी संभव होगा, जब कृषि के सभी अनुषंगी क्षेत्रों (Allied Sectors) का भी समुचित विकास हो। कृषि के विकास का अर्थ है -पशु-संसाधन का पर्याप्त विकास हो, दुग्ध-उत्पादन बढ़े, मत्स्य-पालन की आधारभूत संरचना विकसित की जाये, कुक्कुट-पालन, अंडा उत्पादन, साग-सब्जी एवं फलों के उत्पादन को भी पर्याप्त बढ़ावा मिले। अपने सम्बोधन में राज्यपाल, बिहार श्री लाल जी टंडन ने स्थानीय बी॰आई॰टी॰ कैम्पस सभागार में आयोजित Biennial Conference of Animal Nutrition Association-ANACON-2018 का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा की कृषि में जैसे हम ‘जैविक खेती’ की ओर तेजी से उन्मुख हो रहे हैं, उसी तरह देशी नस्ल की गायों को पालने वाले किसानों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। श्री टंडन ने कहा कि विदेशी नस्ल की गायों की स्वास्थ्य-रक्षा तथा पालन पर काफी खर्च करने पड़ते हैं। ठीक इसके विपरीत देशी नस्ल की गायों को पालने में काफी कम राशि व्यय होती है तथा ये भारतीय जलवायु और प्रकृति के अनुकूल भी हैं। ये कम लागत वाली होने के साथ-साथ भारत में काफी उपयोगी और स्वास्थ्यप्रद भी हैं। राज्यपाल ने कहा कि ‘जीरो बजट’ पर आधारित कृषि-विकास की तरह अल्प व्यय पर उपयोगी पशु-धन का विकास भी अत्यन्त आवश्यक है।