April 18, 2019

18.04.2019 (दरभंगा) : विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रो.एस.के सिंह ने कहा कि सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण हेतु समाज के हर वर्ग को स्वयं आत्मनिर्भर होकर प्रयास करना पड़ेगा। उन्होंने कहा की धरोहर संरक्षण की दिशा में जो भी समाजिक संस्था एवं व्यक्ति कार्य कर रहे है वो पर्याप्त नहीं जान पड़ता है, इसीलिए आज भी सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरें प्रायः नष्ट हो रही हैं| इसके लिए हमें स्वयं आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। इसे रोकने के लिए एक प्रकार की संस्कृति को विकसित करना पड़ेगा, जिसमे अपने धरोहर के प्रति श्रद्धा तथा उसे बचाने के लिए सही नियत का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा की इस दिशा में कारगर कदम उठाया जा सकता है। इसी को दृष्टिगत करते हुए “यूनिवर्सिटी हेरिटेज सेल” बनाने का विचार किया जा रहा है और इंटेक के साथ सहभागिता करके इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा सकेंगे। इस कार्यक्रम में महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय के दीर्घा और तकनीकी सहायक चंद्र प्रकाश ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से दरभंगा की प्राकृतिक धरोहर एवं उसकी संस्कृति” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसके अंतर्गत उन्होंने दरभंगा जिले की नदियों, तालाबों, दुर्लभ पेड़-पौधों तथा पशु-पक्षियों की तस्वीरों को दिखाते हुए उनकी प्राकृतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महता को उजागर किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे इनटैक के कन्वेनर प्रो० एन. के. अग्रवाल ने विश्व धरोहर दिवस की महता को दर्शाते हुए कहा कि यह दिवस विश्व धरोहर स्थलों और स्मारकों के इतिहास, उसकी विशेषता एवं उसके संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है| इसका उद्देश्य इस क्षेत्र के सभी संगठनों के प्रयासों को पहचानना भी है। इसमें आर्किटेक्ट, इंजीनियर, भूगोल, सिविल इंजीनियर, कलाकार और पुरातत्विद शामिल है।