February 17, 2020

16.02.2020 (DarbhangaOnline Desk) : बिहार के सीएम नितीश कुमार ने कहा कि बिहार मद्य-निषेध अभियान के लिए पूरे देश में रोल मॉडल है। शराबबंदी का राजस्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। उन्होंने नई दिल्ली में ‘शराब-मुक्त भारत‘ पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि देश के विभिन्न भागों से आए लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का आयोजन मिलित ओडिसा निषा निवारण अभियान (मोना) द्वारा ईस्ट ऑफ़ कैलाश के इस्काॅन सभागार में किया गया। सीएम ने कहा कि पूरे देश में शराबबंदी लागू होना चाहिए। यह सामाजिक, धार्मिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी आवश्यक है।
बिहार में शराबबंदी अभियान के बारे में अपने अनुभवों को सीएम ने विस्तार से रखा। उन्होंने कहा की ग्रामीण इलाकों में रह रहे गरीब लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर देते थे। इसका सबसे बुरा प्रभाव निर्धन लोगों के स्वास्थ्य एवं उनके आर्थिक स्थिति, खान-पान, घरेलू शांति एवं महिलाओं के सम्मान पर पड़ रहा था। यहां तक कि युवा वर्ग भी शराब के आदी होते जा रहे थे। बढ़ते घरेलू कलह एवं बिगड़ती सामाजिक स्थिति को देखते हुए ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने अपने स्तर पर शराब के विरूद्ध आवाज उठाई और इस पर रोक लगाने की मांग की। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा शराबबंदी की मांग भी उठाई गयी। सीएम नितीश कुमार ने कहा कि शराब के दुष्प्रभाव को लेकर पूरा विश्व चिंतित है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट (ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन अल्कोहल एण्ड हेल्थ 2018) में शराब के दुष्परिणामों के विस्तृत आंकड़े दिए गए हैं और मानव समाज को शराब के कुप्रभाव से निजात दिलाने के लिए एक अभियान चलाने पर बल दिया गया है। 2016 में शराब के कारण विश्वभर में 30 लाख लोगों की मृत्यु हुई है जो विश्व के कुल मृत्यु का 5.3 प्रतिशत है। शराब के सेवन के कारण युवाओं में मृत्यु दर बूढ़े लोगों की अपेक्षा काफी अधिक है और 20 से 39 आयु वर्ग के लोगों में 13.5 प्रतिशत लोगों की मृत्यु शराब के कारण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार शराब लगभग 200 बीमारियों को बढ़ाता है। शराब का सेवन कैंसर, एड्स, हेपटाइटिस, टी.बी, लीवर एवं दिल की बीमारी, मानसिक बीमारी, माता-शिशु से संबंधित बीमारियों के साथ-साथ हिंसक प्रवृति को भी बढाता है और महिलाओं के साथ हिंसा में इसकी अहम भूमिका है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद पूरे देश में ऐसी स्थिति आ गयी है कि आज हर ओर शराबबंदी की मांग तेजी से बढ़ने लगी है।
सीएम ने कहा कि बिहार राज्य में लागू शराबबंदी नीति को अध्ययन करने हेतु विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधिगण आये। वर्ष 2017 में कर्नाटक से, वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ से तथा दिसंबर 2019 में राजस्थान से उत्पाद विभाग एवं अन्य संस्थाओं के अध्ययन दल आये। इन अध्ययन दलों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया और शराबबंदी के क्रियान्वयन को जमीनी स्तर पर देखा। इन सभों दलों ने बिहार में की गई शराबबंदी के सभी प्रयासों की काफी सराहना की। देश के कोने-कोने से शराबबंदी की आवाज उठने लगी है इसलिए शराब के धंधे में लगे लोग परेशान हैं कि कहीं बिहार जैसी शराबबंदी पूरे देश में लागू न हो जाए।
सीएम नितीश कुमार ने कहा कि बिहार में न्याय के साथ विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है, इससे कोई समझौता नहीं करेंगे लेकिन जब तक नशाखोरी, बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों सेे समाज को छुटकारा नहीं मिलेगा, तब तक विकास का पूरा लाभ नहीं मिलेगा। इसके अतिरिक्त, इन दिनों जलवायु परिवर्तन सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरा है, इसलिए हम पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दे रहे हैं।