March 08, 2020

06.03.2020 (दरभंगा) : डिजिटल क्रांति ने विश्व के औद्योगिक क्रांति से भी अधिक प्रभावित किया है l शिक्षा जगत भी हमसे अछूता नहीं है l आज शिक्षा प्राप्ति के लिए कक्षाओं में जाने की भी जरूरत नहीं रही l आप अपने मोबाइल की सहायता से मूंक(मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स) के माध्यम कोर्स कर सकते हैं l भारत सरकार ने 'स्वयं' नामक ई एजुकेशन प्लेटफार्म की शुरुआत की है l न केवल छात्र बल्कि शिक्षक समुदाय भी अपने ज्ञान को अपडेट कर सकते हैं l यह बातें विश्वविद्यालय एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के तत्वधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय छात्र कल्याण के अध्यक्ष प्रोफेसर रतन कुमार चौधरी ने कही l उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन में विचार विमर्श के निष्कर्ष बड़े ही लाभकारी होते हैं l विभाग से अपेक्षा है कि भविष्य में भी सम्मेलन/सेमिनार का आयोजन करते रहें l
वाणिज्य विभागाध्यक्ष एवं सम्मेलन के संयोजक सचिव प्रोफेसर एच के सिंह एवं उनकी पूरी टीम बधाई के पात्र हैं l कार्यक्रम की शुरुआत सम्मेलन के संयुक्त सचिव डॉ. दिवाकर झा के स्वागत भाषण से हुई l 4 तकनीकी सत्र समेत उद्घाटन सत्र के प्रतिवेदको ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। फिर, विशिष्ट अतिथि कोल्हान विश्वविद्यालय झारखंड के वाणिज्य संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर बी एन ओझा ने अपने उद्बोधन में वाणिज्य एवं प्रबंधन शिक्षा में आईसीटी के प्रयोग को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया।
समारोह के दूसरे विशिष्ट अतिथि पटना विश्वविद्यालय के वाणिज्य के प्रोफेसर एवं छात्र कल्याण अध्यक्ष प्रोफेसर एन के झा ने इस तरह के कार्यक्रम में छात्रों की बड़ी संख्या में सहभागिता पर प्रसन्नता जाहिर की।उन्होंने छात्रों एवं शिक्षकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकारिक उपयोग करने की सलाह दी। विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एल पी सिंह ने समापन उद्बोधन में विभाग की विरासत की चर्चा करते हुए भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों की निरंतरता की कामना की। अध्यक्षीय संबोधन में वाणिज्य संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर डीपी गुप्ता ने डिजिटल अर्थव्यवस्था में व्यवसायिक शिक्षा से जुड़े सरोकारों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एच के सिंह, शिक्षाशास्त्र की प्राध्यापिका डॉक्टर मनीषा दिवेदी एवं एस एस राजू द्वारा संपादित पुस्तक 'इफेक्ट ऑफ कल्चरल डायवर्सिटी ओन बिजनेस' का विमोचन भी किया गया l समापन सत्र का अंत प्रोफेसर एच के सिंह के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।
मंच संचालन का दायित्व विभागीय शिक्षक डॉ आशीष कुमार ने निभाया। समापन सत्र के पहले 2 तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ। इन सत्रों में 140 से अधिक पत्रों का वाचन हुआ।