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19.01.2021 (दरभंगा) : वरिष्ठ सामाजिक चिंतक एवं पूर्व विधान पार्षद डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने पत्रकारों से समाज की बदलती धारा में बदलते सामाजिक मूल्यों के बावजूद सत्य का साथ देने का आह्वान करते हुए आज कहा कि वास्तविक सत्य ही अन्तिम सत्य होता है इसलिए कलम के सिपाहियों को समाचार बनाने के क्रम में अपने विवेक का इस्तेमाल करके मर्यादित सत्य की अभिव्यक्ति करने की जरूरत है।

उन्होंने उक्त बातें ख्यातिलब्ध पत्रकार राम गोविंद प्रसाद गुप्ता जी की 25वीं पुण्यतिथि के अवसर पर "सत्य प्रकटीकरण की सीमाएं और पत्रकार का दायित्व" विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा की वास्तविक सत्य ही सत्य होता है इसलिए पत्रकारों को समाचार बनाने के क्रम में इस तथ्य का ध्यान रखना चाहिए और अपने विवेक का इस्तेमाल करके मर्यादित सत्य की अभिव्यक्ति ही करनी चाहिए। यदि सत्य छुपाना आवश्यक हो तब भी उसकी आत्मा नष्ट नहीं हो इसका ख्याल निश्चित रूप में रखा जाए। सामाजिक चिंतक ने कहा कि शब्द का दायरा पत्रकारों को स्वयं निश्चित करना पड़ेगा तभी पत्रकारिता, समाज - राष्ट्र सब का हित सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि समाज की बदलती धारा में सामाजिक मूल्य भी बदले हैं और सत्य का क्या मापदंड हो इसका भी दायरा बदला है।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में राजनीतिक चिंतक एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के राजनीतिक शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ जितेंद्र नारायण ने कहा कि सत्य की अभिव्यक्ति में समाजिक हितों को प्राथमिकता देना अनिवार्य माना गया है। इससे सत्य संपूर्णता से प्रकट तो होता ही है और उसकी शालीनता भी बरकरार रहती है। आजकल सब सत्य को प्रकट नहीं होने देते हैं, उसे खींचते हैं, नतीजतन सत्य विखंडित हो जाता है। जाति, धर्म, भाषा आदि के चश्मे से सत्य को नहीं देखना चाहिए । पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर सत्य को प्रकट नहीं किया जा सकता। सत्य को प्रकट होने देना चाहिए, उसे आरोपित नहीं करना चाहिए। पूर्वाग्रह से ग्रसित लोग ही सत्य को आरोपित करते हैं नतीजतन सत्य दूषित हो जाता है। सत्य विश्लेषण की सीमाएं हैं और इसके वहन की सबसे अधिक जिम्मेदारी पत्रकारों पर है। उन्हें समाज हित, राष्ट्र हित सबका ध्यान रखते हुए सत्य को आमजन तक पहुँचाना होता है। डॉ. जितेंद्र नारायण ने कहा कि सत्य की अभिव्यक्ति में समाजिक हितों को प्राथमिकता देना अनिवार्य माना गया है। इससे सत्य तो संपूर्णता से प्रकट होता ही है, उसकी शालीनता भी बरकरार रहती है। उन्होंने कहा की सबको नग्न सत्य नहीं दिखाना चाहिए क्योंकि लोग इससे विचलित हो सकते हैं। सत्य सर्वांगीण होता है, एकांकी नहीं। इसलिए कलम - कैमरा पकड़कर सार्वजनिक हितों को ध्यान में रखना चाहिए। बिना दार्शनिक बने पत्रकारिता धर्म का निर्वहन नहीं हो सकता और ना ही सच सामने आएगा। इसलिए भारत के ग्रंथों में भी सत्य की विस्तृत व्याख्या की गई है। सत्य को ढ़का नहीं जा सकता पर उसे शालीन रूप में प्रस्तुत करना ही पत्रकारिता का धर्म है। सत्य को परोसने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए अन्यथा पत्रकारिता की आत्मा मर जाएगी। सत्य को आरोपित करने के बजाय उसे प्रस्फुटित होने देना चाहिए, तभी सामाजिक सरोकार की भी रक्षा संभव है।

पत्रकार और बेनीपुर विधायक डॉ. विनय कुमार चौधरी ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि सत्य की परिभाषा समझने के लिए आज कोई तैयार नहीं। सब इसको अपने हिसाब से तय कर रहे हैं। पर सत्य हमेशा सच ही रहता है। समाचार लिखते समय पत्रकारों को वास्तविक सत्य का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि उन पर जन अपेक्षाओं की पूर्ति का भी दायित्व होता है। जन आकंक्षाओं को समझने वाला ही सच्चा पत्रकार होता है और इस बात को श्रद्धेय रामगोविंद गुप्ता जी की पत्रकारिता से समझी जा सकती है। गुप्ता जी की प्रतिष्ठा आज भी इसलिए बरकरार है क्योंकि वह सत्य को जन आकांक्षाओं के चश्मे से देखते थे। पत्रकार भी समाज की सेवा करते हैं इसलिए उन्हें सामाजिक हितों का ख्याल रखना चाहिए। सत्य का क्या प्रभाव समाज व राष्ट्र पर पड़ेगा, इसका ध्यान रखते हुए पत्रकारिता करना ही सच्ची पत्रकारिता कहलाती है। पत्रकार विष्णु कुमार झा ने कहा कि सत्य के पीछे का तथ्य बहुआयामी होता है इसलिए पत्रकारों को उस तथ्य को पटल पर लाना चाहिए जो समाज व देश हित में हो। किसी की निजता भंग नहीं करना चाहिए पत्रकार को। सत्य की तलाश में अंतिम क्षण तक तहकीकात करना जरूरी है।

पत्रकार संजय उपाध्याय ने कहा कि पत्रकारिता जीवन में सत्य का प्रकटीकरण सरल और कठिन दोनों ही है। जल्दबाजी और आपाधापी के दौर में भी सत्य को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। सत्य सरलता से रख देना ही उचित है। उसमें पत्रकारों को अपने विचार समाहित नहीं करना चाहिए। सत्य के लिए अनुसंधान जरूरी है और इसमें अनुभव का भी समावेश आवश्यक है। सत्य के लिए और उसके प्रकटीकरण लिए वरीय साथियों से पत्रकारों को सलाह मशविरा निश्चित रूपेण करनी चाहिए। पत्रकारों का पेशा सामाजिक जीवन से जुड़ा है इसलिए समाज सर्वोपरि है। सत्य का विभिन्न स्वरूप सामने आता है तो जमीनी हकीकत उससे दूर हो जाता है। संगोष्ठी में उपस्थित कई लोगो ने भी इस विषय पर अपनी बातें कही।

संगोष्ठी का प्रारंभ अतिथियों एवं उपस्थित लोगों के द्वारा राम गोविंद प्रसाद गुप्ता जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण कर किया गया। वही संगोष्ठी का संचालन शायराना अंदाज व सरल शब्दों में डॉ. ए डी एन सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप गुप्ता ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गुप्ता ने किया।