Patna

(DarbhangaOnline Desk) : बिहार के डीजीपी श्री गुप्तेश्वर पांडेय ने सोशल मीडिया के माध्यम से बेहतर विधि व्यवस्था के सम्बन्ध में की मन की बात। उन्होंने सबसे पहले बिहार के लगभग बारह करोड़ जनता को प्रणाम करते हुए कहा की बिहार में बेहतर विधि-व्यवस्था बनी रहे इसलिए मैं दृढ संकल्पित हूँ। उन्होंने कहा की बिहार के कोने-कोने में रात को बिना किसी को बताये हुए जाता हूँ। वहां जो निरिक्षण में सोये हुए सुस्त पुलिसकर्मी मिलते हैं। उनके बारे में वहां के एसपी, आईजी, डीआईजी को बताता हूँ। उनपर कार्रवाई होती है जिससे उनकी बेचैनी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा की 90 प्रतिशत पुलिस के जवान बेहतर कार्य करते हैं। बिहार को शराबमुक्त बनाने में मेहनत करते हैं। उन सभी के बदौलत ही बीते दिनों कई त्यौहार एवं चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए हैं। इसके लिए वो धन्यवाद के पात्र हैं। लेकिन मुट्ठी भर वर्दीधारी के वजह से चाहे वो किसी भी रैंक के हों पुलिस महकमा बदनाम हो रहा है। उन्होंने कहा ऐसे लोगो के खिलाफ मैं जब कार्रवाई करता हूँ तो वो तरह-तरह की अफवाहें फैलाने का कार्य करते हैं। मुझे बदनाम करने की कोशिश करते हैं। मेरा मनोबल निचा करने की कोशिश करते हैं। सकारात्मक सोच रखने वाले डीजीपी श्री पांडेय ने साफ़ लफ्जों में कह दिया की जो लोग ऐसा करने की कोशिश करते हैं, जिससे मेरा मनोबल गिरेगा नहीं बल्कि और ऊँचा उठेगा। उन्होंने कहा की जो लोग गरीब जनता का शोषण करेंगे, अपराधियों से सांठ-गाँठ रखेंगे, शराब माफिया, बालू माफिया, भूमाफिया से सांठ-गाँठ रखेंगे, जुआ, गेसिंग आदि का धंधा करवाएंगे ऐसे मुठी भर पुलिस कर्मी को हम छोड़ेगे नहीं। उन्होंने कहा की पुलिस विभाग के सभी लोगों की मैं बड़ी इज्जत करता हूँ। उन सभी के सहयोग से ही मैं बिहार के अवाम के लिए कुछ करना चाहता हूँ। उन्होंने कहा की पुलिस को अपना पुरुषार्थ साबित करना होगा। चंद मुट्ठी भर अपराधी जो लोगों को तकलीफें देते हैं। उन्होंने सभी सिपाही, इंस्पेक्टर, डीएसपी, एसपी, डीआईजी, आईजी को आह्वान करते हुए कहा की आइए हम सब मिलकर कसम खाएं की अपराधमुक्त बिहार बनाने में अपनी अहम् भूमिका निभाएंगे। इससे कोई समझौता नहीं करेंगे, चाहे कोई हो। उन्होंने कहा की हमें आत्मचिंतन करने की जरूरत है की क्यों लोग हमें शक की निगाहों से देखते हैं। इस बात का ध्यान रहे की कोई भी निर्दोष जेल नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा की मेरे जनता दरबार में कई ऐसे केस आते हैं जिसमे लोगों को झूठे केस में फसाकर जेल भेज देने का मामला आता है।

उन्होंने थानेदार, आइओ, डीएसपी के बारे में कहा की न्याय करें जिससे की पुलिस विभाग का नाक हमेशा ऊंचा रहे। उन्होंने सभी फील्ड में कार्य करने वाले ऑफिसर को कहा की गुंडा पंजी हमेशा अपडेट करें। शहर से लेकर गाँव-गाँव तक के सभी गुंडे, लुच्चे, लफंगे, शराब बेचने वाले, अपराधी आदि सब पर सख्त निगरानी रखें, और देखें की वो जेल में हैं या बाहर। अगर बाहर हैं तो क्या कर रहें हैं। डीजीपी ने कहा की जितने भी वांटेड हैं उनकी कुर्की जब्ती करें। कुर्की जब्ती ऐसा हो की लोगों को देखकर रूह काँप जाएँ। गस्ती परेड को टाइट करें। सुचना तंत्र मजबूत करें। चौकीदार को भी जिम्मेदारी दें। जब भी सीनियर ऑफिसर थाने जाएँ तो चौकीदार की परेड करें। जितने भी रंगदार टाइप हैं उनके संपत्ति की जांच करें। उन्होंने कहा की अपराधी किस्म के लोगो को सामाजिक संरक्षण ना दें। ये न कोई जात के हैं न मजहब के और ना ही किसी दल के। उन्होंने नौजवानों, आमजनों एवं अमन चैन पसंद करने वाले लोगों से अपील किया की किसी भी तरह की कोई अपराधी के बारे में गुप्त सुचना हमारे डीजी सेल के नंबर 0612-2294178 पर दे सकते हैं। मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ की थोड़ी देर होगी मगर कारवाई दुरुस्त होगी। आपको किसी से डरने की जरूरत नहीं है।

अगर कोई अपराधियों के बारे में व्हाट्सप्प पर सुचना देना चाहते है तो 9431602301 पर बेहिचक होकर मुझे सुचना दे सकते हैं। इस नंबर पर कोई भी गोपनीय सुचना दे सकते है। ये पूर्ण सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा की अगर व्यक्तिगत भी कोई समस्या हो तो आप मुझे 9431602302 पर सुचना भेज सकते हैं। आपकी गोपनीयता बरकरार रहेगी। डीजीपी ने नौजवानो से अपील करते हुए कहा की आप मेरे आँख और कान बनकर बिहार को अपराधमुक्त बनाने में मदद करें। उन्होंने सभी पुलिस के जवानों से अपील किया की पुलिस पब्लिक फ्रेंडली हो इस बात का पूरा ख्याल रहे।

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डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा की वो जनता दरबार में सोमवार से शुक्रवार तक सरकारी अवकाश को छोड़कर शाम चार बजे से आम जनता से मिलते हैं। जहाँ किसी के कोई पैरवी की जरूरत नहीं है। कोई भी आकर मुझसे मिल सकते है। आखिर में एक बार पुनः उन्होंने नौजवानों से अपील करते हुए कहा की संगठित होकर हमारे हाथ को मजबूत करें एवं सभी पुलिस के जवानों से कहा की बिहार का गौरव हमेशा बढे तथा सुशासन की सरकार सुगन्धित हो इसके लिए आवश्यकता है अपराधियों पर कहर बनकर टूट पड़ें। बड़ा सवाल यह है की आखिर क्यों जरूरत पड़ी डीजीपी को एक बेसिक फ़ोन नंबर और दो मोबाइल नंबर जारी करने की ?