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हमारे विचार सकारात्मक हो तथा जीवन के हर क्षेत्र में स्वच्छता का वातावरण हो तो स्वस्थ रहना आसान होगा

December 02, 2022
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30.11.2022 (दरभंगा) : किसी भी व्यक्ति को अपनी मृत्यु से सर्वाधिक डर होता है। वैसे मृत्यु का कोई न कोई बहाना अवश्य होता है, जिससे बचने का उपाय उन्हें अवश्य करना चाहिए। आज दवा व इलाज से ज्यादा आवश्यकता रोग के प्रति जागरूकता की है, ताकि बीमारी उत्पन्न ही न हो सके। स्वस्थ रहने के लिए हमें अपने शरीर के रोगों के प्रति उत्पन्न प्रारंभिक संकेतों को शीघ्र समझकर, तदनुरूप उनका निदान करना आवश्यक है। हमें समझ होनी चाहिए कि शरीर जैसे ही बीमारी का संकेत करें, तभी हमें सतर्क हो जाना चाहिए। उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केन्द्र तथा स्नातकोत्तर वाणिज्य एवं व्यवसाय अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मेदांता हॉस्पिटल, गुरुग्राम के प्रायोजकत्व में वाणिज्य विभाग के प्रबंधन भवन में आयोजित उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में कही। कुलपति ने कहा कि आज रोगों एवं उनके इलाजों का स्वरूप बदल गया है। हम जिसका नोटिस लेते हैं, वही हमें दिखता है। यूं बढ़ती स्वास्थ्य सुविधाओं एवं जागरूकता के कारण भारत में औसत जीवनकाल बढ़ा है। उन्होंने चिकित्सा टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि आज चिकित्सा के क्षेत्र में मेदांता हॉस्पिटल एक ब्रांड है। हम चाहें शिक्षण पेशा में हो या चिकित्सा पेशा में हमेशा बेहतर बनने की लगातार कोशिश करनी चाहिए। स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि कुलपति के मधुर मुस्कानों में शिक्षण एवं प्रबंधन के गुणों का दर्शन होता है।

वर्तमान प्रदूषण युक्त वातावरण, खानपान एवं आराम तलबी जीवन पद्धति के कारण बीमारियों का बढ़ना स्वाभाविक है। यदि हमारे विचार सकारात्मक हो तथा जीवन के हर क्षेत्र में स्वच्छता का वातावरण हो तो स्वस्थ रहना आसान होगा। उन्होंने स्वास्थ्य को मूल धन बताते हुए इलाज से बेहतर रोगों का बचाव बताया। मेदांता हॉस्पिटल के गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ विमल कुमार साहू ने कहा कि यदि रोगों का प्रारंभिक काल में ही इलाज कराया जाए तो वे आसानी से ठीक हो सकते हैं, अन्यथा वे हमारे लिए गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जिनका इलाज कठिन एवं महंगा होगा। उन्होंने पेट से जुड़ी अनेक बीमारियों की चर्चा करते हुए कहा कि हमें इनको कभी भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। मेदांता हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डा. शांतनु ने बताया कि हर्ट से जुड़ी हुई बीमारियां प्रायः पहले बुजुर्गों को होती थी, परंतु पिछले कुछ वर्षों में, खासकर कोविड-19 के बाद युवाओं में भी यह समस्या तेजी से बढ़ी है। तनावपूर्ण जीवन एवं श्रम रहित जीवन शैली के कारण गंभीर रोग उत्पन्न हो रहे हैं। हम अधिक शारीरिक श्रम एवं मानसिक शांति को अपनाकर गंभीर रोगों से बच सकते हैं।

शिविर में मेदांता हॉस्पिटल के मार्केटिंग मैनेजर शिवकांत व सूर्यदेव, रजनी अधिकारी, प्रिया सिंह, मो शोएब, अमित व ओम सिंह आदि ने सराहनीय योगदान किया। आज के चिकित्सा शिविर में 125 से अधिक विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों, पदाधिकारियों, शिक्षकेतर कर्मियों, अवकाश प्राप्त कर्मियों एवं छात्र- छात्राओं ने अपना बीपी, शुगर, ईसीजी व ब्रेथोमीटर आदि की निःशुल्क जांच कराकर उचित परामर्श प्राप्त किया। आगत अतिथियों का स्वागत पाग, चादर एवं बुके से किया गया, जबकि कार्यक्रम का प्रारंभ कुलपति प्रोफेसर एस. पी. सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। उद्घाटन सत्र में प्रो. जितेन्द्र नारायण, प्रो. ए के बच्चन, प्रो. पुनीता झा, प्रो. ध्रुव कुमार, प्रो. रमेश झा, प्रो. दमन झा, प्रो. ए. के. मेहता, प्रो. मुनेश्वर यादव, प्रो. एच. के. सिंह, डा. दिवाकर झा, प्रो. प्रेम मोहन मिश्रा, डा. महेश प्रसाद सिन्हा, डा. सोनी सिंह, डा. दिव्या रानी हंसदा, डा. विनोद बैठा, डा. सुरेश पासवान, डा. कामेश्वर पासवान, डा. आर. एन. चौरसिया, डा. नैयर आजम, प्रो. राजेन्द्र साह, डा. आनंद प्रकाश गुप्ता, डा. यू. एन. तिवारी, डा. हरेराम मंडल, प्रो. विजय कुमार यादव, प्रो. प्रभाषचन्द्र मिश्र आदि सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे। विभागीय शिक्षिका डा. निर्मला कुशवाहा के संचालन में आयोजित उद्घाटन सत्र में अतिथि स्वागत विश्वविद्यालय के चिकित्सा पदाधिकारी सह शिविर के संयोजक डा. गीतेन्द्र ठाकुर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा. एस. के. ठाकुर ने किया।

ABVP ने पंद्रह सूत्री मांग पत्र कुलपति को सौंपा

December 02, 2022
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30.11.2022 (दरभंगा) : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, दरभंगा के प्रतिनिधिमंडल द्वारा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह को पंद्रह सूत्री मांग पत्र को छात्र हित के लिए तत्काल प्रभाव से लागू करने करने का आग्रह किया। जिसमे PAT परीक्षा 2021 जल्द आयोजित कराया जाए, विगत कई सत्रो का मूल प्रमाण पत्र यथाशीघ्र महाविद्यालयों में भेजा जाए, स्नातक 2018-21 के ex Regular छात्रों का परीक्षा परिणाम अविलंब जारी किया जाए, स्नातक एवं स्नातकोत्तर के सभी लंबित परीक्षाफल शीघ्र प्रकाशित किया जाए, स्नातकोत्तर 2019-21 का मार्कशीट महाविद्यालयों में यथाशीघ्र भेजा जाए, परीक्षा विभाग डाटा सेंटर के वजह से छात्रों को बहुत प्रकार से शोषण हो रहा है उसे यथाशीघ्र दुरुस्त किया जाए, स्नातक सत्र 2018-21 का मार्कशीट महाविद्यालयों में यथाशीघ्र भेजा जाए, स्नातकोत्तर सत्र 2018-20 एवं 2019-21 के छात्रों का दीक्षांत समारोह अविलंब आयोजित करवाया जाए, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के रिक्त स्थानों को यथाशीघ्र भरा जाए, महाविद्यालयों द्वारा विश्वविद्यालय से सबंधित छात्रों के समस्यायों का यथासंभव समाधान करने का पहल किया जाए, सभी महाविधालयों में छात्र-छात्राओं के मूलभूत सुविधा यथा पेयजल, शौचालय की समुचित व्यवस्था अतिशीघ्र की जाए एवं उसकी नियमित साफ-सफाई तथा देखभाल की जाए, बिहार सरकार के नई पहल के तहत शोधार्थी के सभी छात्रों को छात्रवृत्ति मुहैया की जाए, विभिन्न महाविद्यालयों से आने वाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में एक पूछताछ केंद्र बनाया जाए, सी. एम. लॉ. कॉलेज में नामांकन की प्रकिया अविलंब शुरू की जाए शामिल हैं।

अभाविप द्वारा दिए गए मांग पत्रों पर कुलपति ने गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए इसे छात्र हित में लागू करने का आश्वासन दिया। विभाग संयोजक सह पूर्व छात्र संघ महासचिव उत्सव पराशर ने बताया की अगर विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी प्रमुख मांगो को जल्द संज्ञान में नही लिया तो अभाविप आंदोलन करने को बाध्य होगा। प्रतिनिधिमंडल में विश्वविद्यालय संगठन मंत्री दीपक कुमार मिश्र, उत्सव पराशर, शोध प्रमुख वागीश कुमार झा, नगर कार्यकारिणी सदस्य कुणाल कुमार गुप्ता एवम नवनीत कुमार उपस्थित थे।

हिमालय : चुनौतियों का घर विषय पर व्याख्यान दिया गया

November 30, 2022
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28.11.2022 (दरभंगा) : महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन, दरभंगा के द्वारा कल्याणी निवास में महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह के 'जन्म दिवस' के अवसर पर 'महाराजा कामेश्वर सिंह स्मृति व्याख्यान' हिमालय के विशेषज्ञ पद्मश्री प्रोफेसर शेखर पाठक ने "हिमालय : चुनौतियों का घर" विषय पर व्याख्यान दिया। हिन्दी के प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर प्रभाकर पाठक ने स्मृति व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए कहा कि, " प्रोफेसर शेखर पाठक ने हिमालय की समस्याओं और संभावनाओं पर इतना विस्तृत व्याख्यान दे दिया है कि इस विषय पर बोलने के लिए कुछ बच नहीं जाता है। हिमालय की विस्तृत चर्चा कालिदास ने भी विस्तृत रूप से किया है। कालिदास ने हिमालय की पारिस्थितिकी एवं भूगोल का वर्णन किया है, साथ में हिमालय के सौंदर्य की चर्चा की है। हमें हिमालय संबंधित जो ज्ञान कालिदास ने दिया और उससे काफी आगे बढ़कर प्रोफेसर शेखर पाठक ने हिमालय की विस्तृत वैज्ञानिक व्याख्या की है"। अपने मुख्य भाषण में प्रोफेसर शेखर पाठक ने भाषण की शुरुआत महाराजा कामेश्वर सिंह के विशाल व्यक्तित्व और जनोन्मुखी विकास कार्यों को स्मरण करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही बाबा नागार्जुन को मिथिला और हिमालय के संबंध सेतु के रूप में स्मरण किया। हिमालय और उत्तर भारत के मैदान का संबंध नैसर्गिक है और यह क्षेत्र हिमालय के स्वस्थ जीवन पर निर्भर करता है। हिमालय से सिन्धु, गंगा और ब्रह्मपुत्र निकल कर नीचे मैदान को जीवन प्रदान कर रहे हैं वहीं नीचे से असंख्य तीर्थ यात्री उपर हिमालय में जाते रहते हैं। जहाँ हिमालय की नदियों से मैदानी इलाकों को जीवन मिलता है वहीं हिमालय की अनियंत्रित यात्रा उसे दूषित कर रही है। हिमालय जैव विविधता का विश्व में सबसे बड़ा क्षेत्र है, इसकी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए अत्यावश्यक है। अपनी आंतरिक भूगर्भीय संरचना के कारण हिमालय का सतत् निर्माण और क्षरण होता रहता है। आवश्यकता है हिमालय में अत्यधिक यात्राओं को नियंत्रित करने की वरना क्षरण तेज होगा और इसका खामियाजा भारत, पाकिस्तान, नेपाल, तिब्बत, चीन, भूटान, म्यांमार, बंगलादेश के साथ ही मध्य एशिया के देश भी भोगेंगें। हिमालय के उपर भारत नेपाल की सात कड़ोर से अधिक आबादी निर्भर है वहीं इस देश की सत्तर कड़ोर से अधिक आबादी सम्बद्ध है। इसलिए इसकी सांस्कृतिक, पारिस्थितिकी और आर्थिक विविधता को संरक्षित रखना आवश्यक है। अगर हिमालय को हमने संरक्षित नहीं रखा तो हिमालय से सीधे सम्पर्क में रहने वाले सभी देशवासियों की समस्याएं विकराल हो जायेंगी। दुनिया के पूरे भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 0.3 प्रतिशत हिमालय के कब्जे में है, जबकि विश्व का 12℅ से अधिक जैव विविधता वाले क्षेत्र हिमालय के कब्जे में है। भारत का 63℅ जल की आवश्यकता की पूर्ति यही करता है। अपने उद्बोधन में ट्रस्ट के न्यासी पद्मश्री डाक्टर जे० के० सिंह ने महाराजा कामेश्वर सिंह के सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक कार्यों को स्मारित किया। स्वागत भाषण फाउंडेशन के कार्यकारी अधिकारी श्री श्रुतिकर झा ने दिया और धन्यवाद ज्ञापन ट्रस्ट के न्यासी प्रोफेसर रामचंद्र झा ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत सुश्री आस्था झा के भगवती गीत से हुई।

विकास का सबसे बड़ा मापक शिक्षा है

November 30, 2022
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28.11.2022 (दरभंगा) : विकास का सबसे बड़ा मापक शिक्षा है। सामूहिक रूप से लिये गये निर्णय के अनुसार कार्य करना बेहतर होता है। महाराजा स्वर्गीय सर कामेश्वर सिंह शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के प्रति लोक कल्याणकारी एवं बेहतरीन सोच के धनी व्यक्तित्व थे। उनके चिंतन, दर्शन एवं कार्य सराहनीय हैं। उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने 116 वीं जयंती के अवसर पर महाराजाधिराज स्वर्गीय सर कामेश्वर सिंह की आदमकद प्रतिमा का अनावरण करते हुए कही।

कुलपति ने कहा कि महाराजा की बोलती हुई प्रतीत होने वाली मूर्ति दोनों विश्वविद्यालय के प्रवेश स्थल पर स्थापित होना प्रसन्नता की बात है। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से शुभकामनाएं देते हुए मूर्ति की स्थापना में सहयोग करने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक ही परिसर कामेश्वरनगर में 2 विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन अन्यत्र दुर्लभ है। हरेक सृजन कार्य का हमेशा पहले विरोध होता है, परंतु संघर्ष से ही स्थायी उपलब्धियां प्राप्त होती हैं। वहीं कुलपति ने विश्वविद्यालय में नवनिर्मित एडवांस रिसर्च सेंटर का लाल फीता काटकर उद्घाटन करते हुए कहा कि बिहार के विश्वविद्यालयों में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय प्रथम विश्वविद्यालय है, जहां एडवांस रिसर्च सेंटर प्रारंभ हो रहा है। इसका लाभ विश्वविद्यालय के शिक्षकों व शोधार्थियों के साथ ही अन्य लोगों को भी मिलेगा। ई- लाइब्रेरी से बिना शुल्क तथा सशुल्क स्तरीय जर्नलों एवं पुस्तकों को एक क्लिक के माध्यम से शिक्षक व शोधार्थी घर बैठे लाभ उठा सकेंगे। प्रोफेसर सिंह ने बताया कि मेरे कार्यकाल के प्रथम वर्ष में 603 शोधार्थियों ने पीएच डी की उपाधि प्राप्त की जो देश का एक रिकॉर्ड है।

एक प्रश्न के उत्तर में कुलपति ने कहा कि अपने विश्वविद्यालय के सभी छात्र ई- लाइब्रेरी आदि का नि:शुल्क लाभ उठाएंगे, परंतु अन्य लोगों को कुछ शुल्क के साथ लाभ उठाने का अवसर दिया जाएगा। संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर शशिनाथ झा ने कहा कि बड़े हर्ष की बात है कि दानवीर कर्ण सदृश महाराजा कामेश्वर सिंह की मूर्ति का अनावरण विश्वविद्यालय परिसर में हुआ है, जिसका हमलोग काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे। महाराजा का काम ही उनका यश है। उनकी दानशीलता पूरे भारतवर्ष में विख्यात रहा है। उन्होंने मूर्ति स्थापना स्थल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यहां प्रतिदिन शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मियों एवं छात्रों को महाराजा के दर्शन होंगे। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. मुश्ताक अहमद ने कहा कि महाराजा कामेश्वर सिंह की आदमकद प्रतिमा के अनावरण से आज विश्वविद्यालय 50 वर्षों के ऋण से मुक्त हो रहा है। महाराजा होते हुए भी वे समाज के प्रति काफी संवेदनशील थे। उन्होंने मिथिला क्षेत्र में अनेक उद्योगों की भी स्थापना करवायी थी। देश के अधिकांश शैक्षणिक संस्थानों के निर्माणों में उनका सराहनीय योगदान रहा है। आज का दिन विश्वविद्यालय के स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा, क्योंकि आज का यह ऐतिहासिक क्षण हमें गौरवान्वित कर रहा है।

कुलसचिव ने बताया कि विश्वविद्यालय में दिव्यांगों के लिए ब्रेल लाइब्रेरी का भी आज शुभारंभ हो रहा है। वहीं एडवांस रिसर्च सेंटर में कार्यरत एवं अवकाश प्राप्त शिक्षकों के विशेष व्याख्यान रिकॉर्ड होंगे, जिसका लाभ शोधार्थियों व छात्रों को मिलेगा। सीनेट सदस्य डा. बैजू चौधरी ने कहा कि वर्तमान कुलपति महाराजा कामेश्वर सिंह के साथ ही गांधी जी की मूर्ति का भी अनावरण किया है। वहीं अन्य मूर्तियों को भी छतरी प्रदान कर सराहनीय कार्य किया है। दोनों विश्वविद्यालयों का विस्तृत जमीन एवं भवन महाराजा से ही प्राप्त हुआ है। बीएचयू के निर्माण में भी सर कामेश्वर सिंह का सबसे बड़ा योगदान था, जिनके नाम पर आज विश्वविद्यालय में कामेश्वर चेयर संचालित है।

पूर्व विधान पार्षद प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में अनेक ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। महाराजा की मूर्ति के अनावरण को खुशी का अवसर बताते हुए, इनमें संलग्न सभी व्यक्तियों को बधाई एवं धन्यवाद दिया। इस अवसर पर महाराजा के पौत्र रत्नेश्वर सिंह ने कहा कि आज महाराज परिवार के लिए अत्यंत खुशी की बात है कि उनकी मूर्ति की स्थापना दोनों विश्वविद्यालय के संगम स्थल पर हुआ है। इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर एस. पी. सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित एडवांस रिसर्च सेंटर का भी उद्घाटन किया। कुलपति ने सेंटर के विभिन्न सेलों के कोऑर्डिनेटरों तथा संबंधित अधिकारियों से विशेष जानकारियां प्राप्त की तथा निर्देश दिया कि इन कोऑर्डिनेटरों का यथाशीघ्र प्रशिक्षण करा कर कार्यारंभ किया जाए।

इस अवसर पर सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र नारायण, विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. शिशिर कुमार वर्मा, मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. ए के बच्चन, पूर्व कुलसचिव प्रो. अजीत कुमार सिंह, डब्ल्यू आई टी के निदेशक प्रो. विमलेन्दु शेखर झा, परीक्षा नियंत्रक डा. आनंद मोहन मिश्र, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. मंजू राय, डा. सोनी कुमारी, डा. कामेश्वर पासवान, डा. मो. जिया हैदर, डा. घनश्याम महतो, डा. आनंद प्रकाश गुप्ता, प्रो. सुरेन्द्र प्रसाद, डा. सुरेश पासवान, डा. विनोद बैठा, डा. दिव्या रानी हंसदा, प्रो राजेन्द्र साह, प्रो. शहनाज बेगम, डा. रुद्रकांत अमर, डा. आर एन चौरसिया, प्रो. विजय कुमार यादव, प्रो. शाहिद हसन, डा. यू. एन. तिवारी, डा. महेश प्रसाद सिंहा, प्रो. दमन झा, डा. अयाज अहमद, मीना झा एवं गोपाल जी, डा. अरविन्द मिलन, डा. मनुराज शर्मा, प्रो. पूनिता झा, डा. ममता स्नेही, डा. रश्मि शिखा, डा. संतोष कुमार व डा. पूजा अग्रवाल आदि उपस्थित थे। स्वस्तिवाचन गंधर्व जी ने किया, जबकि प्रो. अशोक कुमार मेहता के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अजय नाथ झा ने किया।

अभिषद् की बैठक हुई आयोजित

November 28, 2022
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27.11.2022 (दरभंगा) : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में अभिषद् की बैठक कुलपति प्रो० सुरेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में नरगौना परिसर स्थित कुलपति महोदय के आवासीय कार्यालय के सभाकक्ष में आहूत हुई।

ल० ना० मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के वित्तीय वर्ष 2023 - 2024 की आय - व्यय को सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित किया। आय - व्ययक में किसी प्रकार के त्रुटि को दूर करने हेतु संबंधित विभाग को निर्देशित किया। कुलपति प्रो० सुरेंद्र प्रताप सिंह के आदेशोपरांत बैठक की कार्यवाही शुरू करते हुए प्रो० मुश्ताक अहमद, कुलसचिव ने सभी सदस्यों का स्वागत किया और तदुपरांत कार्यसूची में अंकित विषयों को सदस्यों के समक्ष रखा। अभिषद् की गत बैठक दिनांक 14.11.2022 के कार्यवृत्त पर विचार रखते हुए डॉ० बैद्यनाथ चौधरी ने कर्मचारियों के पोन्नति से संबंधित मामला उठाया और इसे कार्यवृत्त में शामिल करने की बात कही। प्रो० विनोद चौधरी ने उनके माँग का समर्थन करते हुए पोन्नति के बिंदु को कार्यवृत्त में रखने की बात कही। साथ ही अध्यक्ष से अनुरोध किया कि सदस्यों के द्वारा बैठक में रखी गई सभी विषयों को कार्यवृत्त में अंकित किया जाये। इसके उत्तर में प्रो० अहमद, कुलसचिव ने सदस्यों को अवगत करवाया की सभी सदस्यों के द्वारा दिये गए सुझाव और मंतव्य को कार्यवृत्त में अंकित किया जाता है और मानवीय भूलवश अगर कोई बिंदु अंकित नही हो पाया है तो उस विषय को भी अंकित किया जाएगा।

दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की वर्त्तमान स्तिथि की समीक्षा हेतु विश्वविद्यालय द्वारा गठित कमिटी के प्रतिवेदन एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के क्षेत्रान्तर्गत अंगीभूत महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय परिसर स्थित बी०एड० नियमित के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के भुगतान से संबंधित विषयों को स्थगित रखने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है ।डॉ गोपालजी ठाकुर सांसद, दरभंगा ने विश्वविद्यालय से खेलो इंडिया के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम का प्रस्ताव सरकार में भेजने संबंधित जानकारी की माँग की। कुलसचिव ने सदस्य को सदर सूचित किया कि उनके द्वारा दिये गए प्रस्ताव को विश्वविद्यालय द्वारा प्रोजेक्ट के रूप में तैयार करके सभी केंद्र एवं राज्य सरकार के संबंधित विभाग को प्रेषित की जा चुकी है और इसकी एक प्रति उनके सुलभ संदर्भ हेतु प्रेषित किया जाएगा। सांसद ने विश्वविद्यालय के चल अचल संपत्ति के सीमांकन करने का प्रस्ताव रखा जिसके जवाब में विश्वविद्यालय के तरफ से संबंधित विभाग को पत्र प्रेषित करने की सूचना दी गई।

डॉ अमर कुमार ने सम्बद्ध महाविद्यालयों में डोनर अथवा दाता सदस्य के शशि निकाय में सदस्य बनने की प्रक्रिया पर अफसोस जताते हुए सूचित किया कि जिन सम्मानित व्यक्तियों ने महाविद्यालय खोलने हेतु जमीन दिया उनको दरकिनार करते हुए जिन व्यक्तियों ने पचीस हज़ार की राशि दी है उनको दाता सदस्य के रूप में शासी निकाय में तरज़ीह मिलना सही नही है। उनके इस विचार का समर्थन माननीय सांसद दरभंगा ने भी किया और महाविद्यालय के लिये अपना चल अचल संपत्ति देने वालों को नजर अंदाज किये जाने को गलत करार दिया। प्रो० अहमद ने सदन को सूचित किया कि सम्बद्ध महाविद्यालयों में दाता सदस्य का चुनाव शासी निकाय के द्वारा की जाती है। इसमें विश्वविद्यालय प्रावधानों के अंतर्गत कोई दखल नही दे सकती है। इसी क्रम में प्रो० विनोद चौधरी और सांसद, दरभंगा ने डॉ० बैद्यनाथ चौधरी को चार सम्बद्ध महाविद्यालयों के शासी निकाय के सदस्य नही होने को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

प्रो० विनोद चौधरी ने संत कबीर महाविद्यालय के दाता सदस्य की जाँच करने की माँग की। विद्वत परिषद की बैठक के कार्यवृतों को सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया। साथ ही सांसद डॉ ठाकुर एवं श्रीमती मीना झा ने आर०के०कॉलेज चंदोना, दरभंगा को नव संबंधन देने हेतु महाविद्यालय के द्वारा दिये गये शपथ पत्र पर नियमतः विचार करने की बात कही। प्रो० हरि नारायण सिंह ने दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में नामांकित छात्रों के लिये स्व- अधिगम सामग्री के भुगतान के निर्णय को सही बताया साथ ही उक्त सामग्री जरूरत के हिसाब से ली गई थी या नही इसके औचित्य की माँग की। इसके उत्तर में सदस्य को सूचित किया गया कि सभी सामग्री को छात्रों में शत प्रतिशत बाँट दिया गया था इसीलिये आवश्यकता से अतिरिक्त सामग्री क्रय का विषय नही बनता है। वित्त समिति की बैठक दिनांक 26.11.2022 के कार्यवृतों को सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया। कुलपति सह अध्यक्ष महोदय ने सभी सदस्यों के रचनात्मक एवं सकारात्मक सहयोग हेतु साधुबाद ज्ञापित किया। कुलसचिव प्रो० अहमद ने सदस्यों को सदन के सफल संचालन में सहयोग हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

बैठक में डा. फैयाज अहमद, डॉ० गोपालजी ठाकुर, डा. अमर कुमार, प्रो. शिशिर कुमार वर्मा, डा. नैयर आजम, डा. नंद कुमार, प्रो. अजय नाथ झा, प्रो. विजय कुमार यादव, प्रो. अशोक कुमार मेहता, प्रो० हरि नारायण सिंह, प्रो० विनोद चौधरी, डॉ० बैधनाथ चौधरी आदि उपस्थित हुए।
   होली  क्रॉस स्कूल - 31वाँ दो दिवसीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता
                    दरभंगा प्रेस क्लब का उद्घाटन - 2025
                             बिहार पुलिस सप्ताह 2025
              पुलिस पुरस्कार समारोह (दरभंगा) - 2024
SN Sarraf Hospital Darbhanga
SN Sarraf Hospital Darbhanga Press Conference
         दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल - पुरस्कार समारोह

23.02.2024 23.02.2024 (दरभंगा) छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से खचाखच भरे ऑडिटोरियम में 90 यूजी और 24 पीजी गोल्ड मेडल बांटे गए। डॉ आसिफ शाहनवाज के नेतृत्व में पूरी तरह से गढ़े हुए आयोजन मैं छात्रों और विभागों के उम्मीदें परवान चढ़ती हुई नजर आई। दिन रात की परिश्रम को सोने के मेडल में बदलते हुए देखकर छात्रों के दिल उछल गए। विभागाध्यक्षों और स्पॉन्सर की मौजूदगी में प्राचार्य और अधीक्षक द्वारा गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।
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डॉ त्यागराजन एस एम चैंपियन डीएम बने

10.08.2021 (दरभंगा) : सीएम नीतीश कुमार द्वारा बिहार में 01 जुलाई से 06 माह में 06 करोड़ वयस्कों को लगेगा टीका टीकाकरण महाअभियान चलाया जा रहा है। दरभंगा जिला में डीएम डॉ. त्यागराजन एस.एम की निगरानी एवं अनुश्रवण में चलाए जा रहे टीकाकरण महाअभियान दरभंगा में 06 माह में लगेगा 26 लाख वयस्कों को टीका के तहत दरभंगा जिले के सभी प्रखण्डों एवं शहरी स्थाई टीकाकरण केन्द्र ने सारे रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक दरभंगा के 9 लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग, बिहार द्वारा कोविड-19 टीकाकरण महाअभियान की राज्य स्तरीय समीक्षा में कोविड 19 वैक्सीनेशन प्रोग्राम में सर्वाधिक उत्कृष्ट कार्य के लिए दरभंगा के डीएम डॉ. त्यागराजन एस.एम को चैंपियन डीएम के ख़िताब से नवाजते हुए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि पटना व पूर्वी चंपारण के डीएम को भी चैंपियन डीएम के ख़िताब से नवाजा गया है।
डीएम को कोविड-19 टीकाकरण में शानदार प्रदर्शन एवं सफल संचालन हेतु मिला प्रमाण पत्र

10.08.2021 (पटना) : डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह को कोविड-19 टीकाकरण के सुगम, सुचारू एवं सफल संचालन करने तथा शानदार प्रदर्शन करने हेतु स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए हैं। जिला के इस महत्वपूर्ण एवं शानदार उपलब्धि के लिए अधिकारियों कर्मियों मीडिया कर्मियों एवं बुद्धिजीवियों ने उन्हें बधाई दी है तथा उनके द्वारा किए गए कार्य को अद्वितीय एवं अविस्मरणीय बताया गया। दूसरी ओर डीएम ने इसे अधिकारियों कर्मियों एवं जिलावासियों के समन्वित प्रयास तथा पूरी टीम का सम्मान एवं प्रतिफल बताया है।
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04.07.2019 (दरभंगा): दिल्ली में दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने केंद्रीय रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर दरभंगा सहित मिथिलांचल के सर्वांगीण विकास हेतु विभिन्न ज्ञापन सौंप रेल मंत्री का ध्यान आकृष्ट किया।
                        बिहार पुलिस सप्ताह - 2019
दरभंगा : एसएसपी बाबू राम के नेतृत्व में बिहार पुलिस सप्ताह 22 फरवरी से 27 फरवरी के अंतर्गत कई कार्यक्रम आयोजित किये गए। जिसमे स्कूली बच्चों द्वारा रन फॉर पीस, पेंटिंग प्रतियोगिता, ऑटो चालकों के द्वारा जागरूकता रथ आदि। सभी कार्यक्रम का थीम था नशामुक्त हो समाज, ट्रैफिक नियमों का पालन करें।
Lalit Narayan Mithila University
                          गणतंत्र दिवस - 2019
                        स्वतंत्रता दिवस समारोह - 2018
विशेष प्रोफ एस. के. सिंह, कुलपति, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय
द्वारा : मनीष कुमार सिन्हा
प्रोफेसर एस के सिंह ने दरभंगा ऑनलाइन के साथ शिक्षक प्रशिक्षण के लिए यूनिसेफ के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताछर और विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा में डिजिटल मोड के माध्यम से सामग्री के वितरण के बारे मे बात की.
                             पटना एसएसपी मनु महाराज


पटना एसएसपी मनु महाराज - साइकिल एक तरफ जहां स्वास्थ के लिए अच्छा है वहीं एक आम आदमी के भेष मे होने से बहुत सारी ऐसी बातों का पता लगता हैं जिससे की पोलिसिंग बेहतर करने मे मदद मिलती है.
                 मानस बिहारी वर्मा को पद्मश्री सम्मान


दरभंगा के निवासी, मानस बिहारी वर्मा, तेजस के पूर्व कार्यक्रम निदेशक, भारत के पहले स्वदेशी बहु-भूमिका सुपरसोनिक लड़ाकू विमान को उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया।.
विशेष मिथिला लोक उत्सव २०१७ - दुखी राम रसिया द्वारा मनमोहक प्रदर्शन
द्वारा : मनीष कुमार सिन्हा
                        स्वतंत्रता दिवस समारोह - 2017
   विग्रहपुर मे बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम मे जिला पदाधिकारी


28.04.2017 (पटना):विग्रहपुर मोहल्ले मे बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम मे भाग लेने पहुँचे जिला पदाधिकारी डॉ संजय कुमार अग्रवाल ने बच्चों को शिखा के लिए प्रोत्साहित किया. जिला पदाधिकारी की उपस्थिति ने बच्चों का हौसला बढ़ाया और बच्चे काफी उत्साहित हुए.
                        बिहार प्रदेश मारवाड़ी सम्मलेन


23.04.2017 (पटना):बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मलेन एक ऐसी संस्था है जो समाज कल्याण की बिभिन्न क्षेत्रों में भी सक्रिय है. इस संस्था को दहेज़ प्रथा उन्मूलन, नशा उन्मूलन आदि बिभिन्न सामाजिक कल्याण के कार्योँ में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए - महामहिम राम नाथ कोविंद ने स्थानीय बिहार चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के सभागार में आयोजित बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मलेन के खुले अधिवेशन को मुख अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुआ उक्त विचार व्यक्त किये.
         महात्मा गाँधी सत्याग्रह सताब्दी वर्ष का आयोजन


गांधीजी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत की पहली वास्तविक प्रयोगशाला बनने का सौभागय बिहार की चम्पारण की धरती को प्राप्त है. सत्य और अहिंसा के प्रयोग को आज आचरण में उतारने की आवश्यकता है. जातीयता , धार्मिक रूढ़ियाँ, बाह्याडम्बर, क्षेत्रबाद, संकीर्णता आदि से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानना ही चम्पारण सत्याग्रह के सताब्दी आयोजन की सही सार्थकता होगी. - महामहिम राज्यपाल श्री राम नाथ कोविंद।